Sunday, January 29, 2012

प्यार का दर्द,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

प्यार का दर्द,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

दोस्तों ,,,,,,,,,

                

                          
फूल की शुरुआत कली से होती है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,                                                           


                जिन्दगी की शुरुआत प्यार से होती है 


                प्यार की शुरुआत अपनों से होती है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

                और अपनों की शुरुआत आप से होती है 


प्यार करने वालो को प्यार का बहाना चाहिए ,,, प्यार पाने और जताने का मोका व्  हो तो दो कब पीछे रहे सकते है सच प्यार से कभी किसी का जी भरा नहीं है यह एक ऐसा खजाना है जिसे जितना भी लुटाया जाए ,,,,,कम नहीं होता ,,,,,,,,,,,तो दोस्तों किसी काश को प्यार का पैगाम ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

 

एक ऐसा पैगाम जो किसी के जीवन के खालीपन को भर दे। किसी के मायूस चेहरे पर उम्मीद की खुशी ला दे। वर्षों से जिस शब्द को सुनने का इंतजार था वह इंतजार की घड़ी खत्म हो जाए। आज जिस प्रकार सूरज की रोशनी ने कोने-कोने में छुपे अँधेरे को उजाले में बदल दिया है उसी प्रकार आप भी अपने साथी के दिल से दुख, नफरत, गिले-शिकवे को हमेशा के लिए खत्म कर दें। प्यार में वह गर्मी है जो दिल में जमी गलतफहमी और अविश्वास की बर्फ पिघला सकती है। तो आज छलकाएँ प्यार का जाम और खाली न होने दें प्यार का पैमाना।

कहते हैं, प्यार में जो नशा है वह किसी शराब में नहीं। प्यार के नशे में गोते लगाएँ और जीवन की तमाम कड़वाहट को भूल जाएँ। बहुत सारे प्यार करने वाले सालों से इसी संकोच में बैठे हैं कि यदि उन्होंने अपनी भावना का इजहार अपनी या अपने दोस्त के सामने किया तो वह नाराज न हो जाए। इस चक्कर में दोस्ती भी हाथ से न चली जाए पर जब आज दिल कह रहा है तो करें प्यार का इजहार। अगर जवाब नहीं में आए तो भी उसे सँभाल लें।

आजकल तो इजहार-ए-इश्क बहुत ही उदारता के साथ लिया जाने लगा है। आप कह सकते हैं कि मेरी दोस्ती में प्यार जैसी भावना की गहराई है। आज प्यार शब्द का इस्तेमाल करके हमने अपनी दोस्ती पर पक्की मुहर लगा दी है। पर अपने दिल की बात को लंबे समय तक दबाए रखना अक्लमंदी नहीं है। कुछ लोग अपने जीवन में प्यार बाँटते चलो के सिद्धांत पर चलते हैं और उन्हें उसी में खुशी भी मिलती है। यदि हम भी इसी सिद्धांत को जीवन में लागू करके चलें तो हमारे लिए भी खुशियों का अंबार राहों में पड़ा मिले।


अपनी कोई भी कमी, मुश्किल और तमन्ना बेझिझक सहजता से कह डालें। दिल हलका हो जाएगा और मन का गुबार धुल जाएगा। जैसे, होली, दिवाली और ईद पर हम ऐसे मूड में होते हैं कि हम हर मुस्कराते चेहरे और आगे बढ़े हुए हाथ का स्वागत करते हैं। उसी प्रकार हम प्यार में दिल की तमाम रंजिशों को भुलाकर एक नई शुरुआत करें। 

दिल से याद करते हैं
आंखों से आंसूं छलक जाते हैं
कभी हजार बातें करते थे
अब एक बात के लिये तरस जाते हैं


प्यार के कैनवास को बड़ा करें ताकि उसमें तमाम तरह के रंगों और उसके शेड से जीवन की बहुआयामी तस्वीर बनाई जा सके। एक ऐसी तस्वीर जिसमें दोनों के विकसित होने का अवसर हो। जिसमें दोनों के सपनों के लिए पर्याप्त जगह हो। त्याग व कोमलता के रंग दोनों पर समान रूप से बिखरे हों। जहाँ लाल रंग से तकलीफ का अहसास नहीं बल्कि आशा की लालिमा का संदेश मिले। ऐसी तस्वीर जिसकी आँखों में जमाने के दर्द पर किसी के साथ होने की खुशी का रंग चढ़ा हो। मंजिल चाहे जितनी भी दूर हो उसे पाने का हौसला दोनों की आँखों में साफ नजर आए। प्यार के रिश्ते की तस्वीर इतनी विशाल हो कि उसमें दोनों की कमजोरियों को भी गुजारे के लिए उचित स्थान मिल जाए।

खुशियों के नए-नए बहाने ढूँढ़ना ही अच्छे प्रेमियों की निशानी होती है। अपने अंदर एक संकल्प करें कि अपने साथी को खुश रखने के तमाम रास्ते आप खोज लेंगे। किस बात से और क्या करने से उसके मूड में खुशियों का प्रवेश होता है, इसका पता लगाने की जिम्मेदारी हर प्यार करने वालों की होनी चाहिए। आज के दिन एक बात गाँठ बाँध लें कि अपने प्यार के प्रति हमेशा आदर की भावना रखें। किसी बात पर असहमति होने पर भी कोशिश करें कि मन शांत हो जाए तब ही उस विषय को छेड़ें।

शब्दों का प्रभाव हमारे रिश्ते पर बहुत पड़ता है। उत्तेजना में कई बार दुर्भावना नहीं होने पर भी हम मन को आहत करने वाले शब्द बोल देते हैं। ऐसे शब्द महीनों के खूबसूरत बिताए पलों को झटके में धो डालते हैं और वहाँ चोट के निशान छोड़ जाते हैं। प्यार भरे शब्द और सच्ची भावना प्यार को बहुत ही ठोस आधार देते हैं। आप यह वायदा लें कि प्यारे शब्द, प्यारी सोच और सच्चे भरोसे का दामन आप कभी नहीं छोड़ेंगे। आपकी यह कोशिश साल के 365 दिन सच्चे प्यार का ही अहसास कराएगी।

Wednesday, January 25, 2012

गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है


भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 को 21 तोपों की सलामी के बाद भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज को फहराकर 62 वर्ष पहले भारतीय गणतंत्र के ऐतिहासिक जन्‍म की घो‍षणा की थी। अंग्रेजों के शासनकाल से छुटकारा पाने के आठ सौ चौरान्यवें (894) दिन बाद हमारा देश स्‍वतंत्र राज्‍य बना। तब से आज तक हर वर्ष राष्‍ट्रभर में बड़े गर्व और हर्षोल्लास के साथ गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। 


लगभग 2 दशक पुरानी यह यात्रा थी जिसे सन् 1930 में एक सपने के रूप में संकल्पित किया गया था और हमारे भारत के शूरवीर क्रांतिकारियों ने सन् 1950 में इसे एक स्वतंत्रता के रूप में साकार किया। तभी से धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक राष्‍ट्र के रूप में भारत का निर्माण एक ऐतिहासिक घटना रही। यह भी कहा जाता है कि 31 दिसंबर 1929 की मध्‍य रात्रि में भारतीय राष्‍ट्रीय कांग्रेस के लाहौर सत्र के दौरान राष्‍ट्र को स्वतंत्र बनाने की पहल की गई थी। इस सत्र की अध्यक्षता पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। उस बैठक में उपस्थित सभी क्रांतिकारियों ने अंग्रेज 
सरकार के कब्जे से भार‍त को आजाद करने और पूर्णरूपेण स्‍वतंत्रता को सपने में साकार करके 26 जनवरी 1930 को 'स्‍वतंत्रता दिवस' के रूप में एक ऐतिहासिक पहल बनाने की शपथ ली थी। भारत के उन शूरवीरों ने अपनी लक्ष्य पर खरे उतरने की भरकस 
कोशिश करते हुए इस दिन को स्वतंत्रता के रूप में सार्थक मनाने के प्रति एकता दर्शाई और भार‍त सचमुच स्वतंत्र देश बन गया। उसके बाद भारतीय संविधान सभा की बैठकें होती रहीं, जिसकी पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को हुई, जिसमें भारतीय नेताओं और अंग्रेज कैबिनेट मिशन ने भाग लिया। भारत को एक संविधान देने के विषय में कई चर्चाएँ, सिफारिशें और वाद-विवाद किया गया। कई बार संशोधन करने के पश्चात भारतीय संविधान को अंतिम रूप दिया गया जो 3 वर्ष बाद यानी 26 नवंबर 1949 को आधिकारिक रूप से अपनाया गया। इस अवसर पर डॉ. राजेन्‍द्र प्रसाद ने भारत के प्रथम राष्‍ट्रपति के रूप में शपथ ली। हालाँकि भारत 15 अगस्‍त 1947 को एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र बन चुका था, लेकिन इस स्‍वतंत्रता की सच्‍ची भावना को प्रकट किया तथा 26 जनवरी 1950 को। इर्विन स्‍टेडियम जाकर राष्‍ट्रीय ध्‍वज फहराया गया और गणतंत्र के रूप में सम्मान देकर भारतीय संविधान प्रभावी हुआ।

सभी देशवासियों गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ..................................................................

Friday, January 13, 2012

HAMARI KHABAR: मकर संक्रांति पर्व प्रेम और धर्म का

HAMARI KHABAR: मकर संक्रांति पर्व प्रेम और धर्म का: मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है । मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व है। दान में तिल और गुड़ देना विशेष फल देने वाला माना ...

मकर संक्रांति पर्व प्रेम और धर्म का



मकर संक्रांति पर्व 14 जनवरी  को मनाया जाता है ।
 मकर संक्रांति पर दान का विशेष महत्व है। दान में तिल और गुड़ देना विशेष फल देने वाला माना जाता है। परंपरागत रूप से लोहड़ी पर लोग हवन का आयोजन करते है, जिसमें तिल, घी, मूंगफली की आहुति डाली जाती है। शिमला के उपरी क्षेत्रों में संक्रांति पर तिल के लड्डू बनाने की परम्‍परा है। लोहड़ी के अगले दिन मकर संक्रांति पर्व पर दान पुण्य को विशेष महत्‍व दिया जाता है। तिल और खिचड़ी के दान को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। घरों में संक्रांति के दिन तिल के व्यंजन और खिचड़ी बनाई जाती है। मकर संक्रांति पर लोग सूर्य पूजन कर पवित्र नदियों में स्नान कर पुण्य प्राप्त करते हैं। कहा जाता है कि माघ माह की पूर्णिमा में जो व्यक्ति ब्राह्मण को दान करता है,उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है 

स्नान 

मकर संक्रांति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यंत शुभकारक माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गई है। सामान्यत: सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किंतु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायक है। यह प्रवेश अथवा संक्रमण क्रिया छ:-छ: माह के अंतराल पर होती है। भारत देश उत्तरी गोलार्द्ध में स्थित है। मकर संक्रांति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात भारत से दूर होता है। इसी कारण यहाँ  रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं तथा सर्दी का मौसम होता है, किंतु मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। अत: इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गरमी का मौसम शुरू हो जाता है। दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा तथा रात्रि छोटी होने से अंधकार कम होगा। अत: मकर संक्रांति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है