Thursday, February 23, 2012

नमस्कार दोस्तों आज कुछ मन्नाडे के बारे मै,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

                                                         सुर - बहार 
नमस्कार दोस्तों ;;;;;;;
मै आप का अपना देश दीपक मिश्र  और आप को बता रहे है संगीत का अपना  मन पसन्द कार्यक्रम "सुर -बहार "के बारे मै ,,,,,,,,?????????????
दोस्तों ;,,,,,
आज हम बात करेगे दादा साहब फाल्के अवार्ड से सम्मानित उस आवाज के बारे मै जो फ़िल्मी और गैर फ़िल्मी गायकी मै अपनी एक अलग पहचान बनाये हुए है ,,,,,,,,,,,,,,,,,
गाना -1  
http://www.youtube.com/watch?v=wC8nniKEuPY&feature=results_main&playnext=1&list=PLB830640082F73955


जी हां ;,,,,,,
ये दमदार -असरदार और शानदार आवाज है , 86  से ज्यादा बसंत देख चुके सदाबहार संगीत साधक मन्नाडे की ,शास्यीय संगीत हो ,सुगम संगीत हो या फिर फ़िल्मी सगीत मन्ना डे गले से दिल से गाते है ,,,,,,,इसलिए उनकी आवाज सुनने वालो के दिल तक उतर जाती है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
गाना  -2  
http://www.youtube.com/watch?v=MowQwVnLwi0&feature=BFa&list=PLC938ED9B73AF1F87&lf=results_main




दोस्तों ;,,,,,,,,,
बचपन से ही मन्नाडे को संगीत से गहरा लगाव था ,मजे की बात यह है की मन्नाडे को संगीत के साथ -साथ मुक्केवाजी और कुश्ती जैसे खेलो  मै  भी गहरी रूचि थी स्कूल के शुरूआती दिनों मै वे मेज बजाकर गीत गाया करते और अपने सहपाठियो का भरपूरमनोरंजन करते थे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
गाना -3 
http://www.youtube.com/watch?v=_iiFqsZ5ZaA




मन्नाडे की ,,,,,,,,,,
संगीत प्रतिमा को उनके चाचा और उस जमाने के प्रसिद्ध संगीत शिक्षक कृष्णचद्रडे  ने पहचाना ,आगे चल क्र मन्नाडे ने अपने चाचा के साथ एक सहायक संगीत निदेर्शक के रूप मै काम करना शुरू किया ,1942  मै वे एस डी वर्मन जैसे महान संगीतकारो से जुड़े .कई अन्य संगीतकारो की मदद करने के बाद अंतत मन्नाडे ने स्वतंत्र रूप से काम करना शुरु किया ,,,,
गाना -4 
http://www.youtube.com/watch?v=FVBEKXGYxbI
दोस्तों ;,,,,,,,,,,
एक पाशर्व गायक के रूप मै मन्नाडे ने सबसे पहले फिल्म तमन्ना मै गीत गाया ,यही से उनकी गायकी परवान चड़ने लगी 
सुर नीचा हो या ऊँचा  मन्नाडे की आवाज सुरों के साथ खेलने लगी ;,,,,,,,,,,
गाना -5 
http://www.youtube.com/watch?v=Q-bh3Q3qFEk


जी हा ;,,,,,,,
मन्नाडे एक बहुमुखी गायक है ,उनकी गायकी के कई रंग है एक और उनकी गायकी गम्भीर है ,दर्द मै लिपटी है ,,,,,,,,,,
गाना -6 
http://www.youtube.com/watch?v=zciOVqRsqxk&feature=results_main&playnext=1&list=PLB830640082F73955


गम्भीरता और दर्द के साथ साथ मन्नाडे की गायकी मै नटखटपन और मस्ती भी सुनने को मिलती है ,,,,,,,,,,,,,,,,
गाना -7 
http://www.youtube.com/watch?v=irLy5_adwc0


दोस्तों ;,,,,,,,,
कई रंगों के साथ साथ मन्नाडे कई गायकी मै प्रेम का भी रंग है जब कोई पायल कई छम छम करते हुए मन के द्वार पर दस्तक देता है तो दिल गा उठता है ,,,,,,,
गाना -8 
http://www.youtube.com/watch?v=5_e5Wbs59aY


प्रेम मै संयोग है तो वियोग भी है मिलन का सुख है तो जुदाई का दर्द भी है कोई साथ रहे और फिर न रहे तो केसे कटती है जुदाई कई राते उस दर्द को मन्नाडे कई आवाज ने इस गीत मै बखूबी बयाँ किया है ;,,,,,,,,,,,,,,,,,,
गाना -9 
http://www.youtube.com/watch?v=ZgKR8fFb_dw


मन्नाडे ने जहां एक और गम्भीर गायकी कई वही उनके द्वारा गए कुछ गीत आमजनता मै इतने लोकप्रिय हए  कि वे उनकी जुबान पर चड़ गये शाम और जाम कि मस्ती से भरा यह गीत भला कोन भूल सकता है ,,,,,,,,,,,,
गाना -10 
http://www.youtube.com/watch?v=FsrVehU3Dzo


मन्नाडे कि गायकी मै कमेडी का भी रंग सुनने को मिलता है उन्होंने कमेडी से भरपूर कई गाने गये ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
गाना -11 
http://www.youtube.com/watch?v=irLy5_adwc0


मन्नाडे कई गायकी मै कव्वाली का भी रंग है अमिताभ बच्चन कई पहली सुपरहिट फिल्म जंजीर कई हिट कव्वाली आज भी दोस्ती का सही मतलब है ,,,,,,,,,,,,,,,
गाना -12 
http://www.youtube.com/watch?v=djYzQljIxew
जी हाँ 
मन्नाडे की गायकी मै देशभक्ति की भावना का रंग भी है शायद तभी उन्हें भारत का राट्रीय गायक कहाजाता है कालेपानी की संजा पाए एक देशभक्त को जब अपने देश की याद आती  है तो उसकी आँखों मै पानी आने के साथ साथ इस गीत को सुनने वालों की आखों मै भी पानी आ जाता है ,,,,,,,,,,
गाना -13 
http://www.youtube.com/watch?v=7KIcWTV3MME


मन्नाडे की गायकी मै भक्ति का भी रंग है ,वे अपनी आवाज मै इस्गित मै भगवान कृष्ण से विनती करते है ,,,,,,,,,
गाना -14 
http://www.youtube.com/watch?v=auO9oQqeC88&feature=fvst


मन्नाडे की संगीत साधना का चरम उत्कर्ष शास्यीय संगीत पर आधरित उस गीत मै सुनने को मिलता है ,जो आज भी सुनने वाला को रोमांचित क्र देता है ,,,,,,,,,,,,,,
गाना -15 
http://www.youtube.com/watch?v=bKBggo3TAII&feature=fvst
दोस्तों 
मन्नाडे ने 50 से आधिक वर्षों तक मुंबई मै रहकर हिंदी ,बंगला ,मराठी आदि कई भाषाओं मै हजारों गीत गाये उन्होंने अपने समय के सभी बड़ें पाशर्व गायकों गायिकाओं और संगीतकारों के साथ काम किया 
उनके द्वारा गाये गीत संगीत कई दुनिया मै मिल का पत्थर है 


                              THE END



























Saturday, February 18, 2012

महाशिवरात्रि,,,,,,,,,,,,

शिव की आराधना का पर्व ,,,,,,



महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का पर्व है। हिंदुओं के इस प्रमुख पर्व को फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है  महाशिवरात्रि व्रत की यह विशेषता है कि इस व्रत को बालक, स्त्री, पुरुष और वृ्द्ध सभी कर सकते है.


इस व्रत के दिन भगवान शिवलिंग दर्शन के लिए हजारों की संख्या में शिव भक्त आते है. सभी शिवालयों में महाशिवरात्रि के दिन बेल, धतूरा और दूध का अभिषेक किया जाता है. शिवरात्रि मात्र एक व्रत नहीं है, और न ही यह कोई त्यौहार है. सही मायनों में देखा जायें, तो यह एक महोत्सव है. इस दिन देवों के देव भगवान भोलेनाथ का विवाह हुआ था. उसकी खुशी में यह पर्व मनाया जाता है.

शास्त्रों में इस तिथि के विषय में कहा गया है, कि जिनकी जटाओं में गंगा भी शरण लेती है, तीनों लोक ( आकाश, पाताल व मृ्त्यु) के वासियों को प्रकट करने वाले है. जिनके नेत्रों से तीन अग्नि निकल कर शरीर का पोषण करति है. ऎसे श्री भगवान शिव भगवान इस तिथि में विवाह रचा कर प्रसन्न है.



व्रत के फल 

महाशिवरात्रि व्रत करने से साधक को मोक्ष प्राप्ति के योग्य बनाती है. इस व्रत को करने से व्यक्ति का कल्याण होता है. उपवासक के सभी दु:ख, पीडाओं का अंत होता है. साथ ही उसकी इच्छित मनोकामना की पूर्ति होती है. यह व्रत धन, सुख-सौभाग्य, समृ्द्धि की प्राप्ति होती है. इस व्रत को जो भी प्रेम भक्ति के साथ करता है, उसके सभी मनोरथ भगवान शिव की कृ्पा से पूर्ण होते है.

भगवान शिव की पूजा शुद्ध चित से करनी चाहिए. भगवान श्री देव, देवों के देव है. उनका एक नाम नीलकण्ठ है, विश्वनाथ है. भगवान भोलेनाथ का व्रत करने से व्यक्ति कि धन के प्रति क्षुधा, पिपासा, लोभ, मोह आदि से मुक्ति मिलती है. बुद्धि निर्मल होती है. और जीवन सदकार्यो की ओर प्रेरित होता है.



महाशिवरात्रि की व्रत-कथा


एक बार पार्वती ने भगवान शिवशंकर से पूछा, ‘ऐसा कौन सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्यु लोक के प्राणी आपकी कृपा सहज ही प्राप्त कर लेते हैं?’
उत्तर में शिवजी ने पार्वती को ‘शिवरात्रि’ के व्रत का विधान बताकर यह कथा सुनाई- ‘एक गाँव में एक शिकारी रहता था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधवश साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी।
शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा। चतुर्दशी को उसने शिवरात्रि की कथा भी सुनी। संध्या होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की। शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छूट गया।
अपनी दिनचर्या की भाँति वह जंगल में शिकार के लिए निकला, लेकिन दिनभर बंदीगृह में रहने के कारण भूख-प्यास से व्याकुल था। शिकार करने के लिए वह एक तालाब के किनारे बेल वृक्ष पर पड़ाव बनाने लगा। बेल-वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो बिल्वपत्रों से ढँका हुआ था। शिकारी को उसका पता न चला।
पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियाँ तोड़ीं, वे संयोग से शिवलिंग पर गिरीं। इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ गए।
एक पहर रात्रि बीत जाने पर एक गर्भिणी मृगी तालाब पर पानी पीने पहुँची। शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची, मृगी बोली, ‘मैं गर्भिणी हूँ। शीघ्र ही प्रसव करूँगी। तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है। मैं अपने बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे सामने प्रस्तुत हो जाऊँगी, तब तुम मुझे मार लेना।’ शिकारी ने प्रत्यंचा ढीली कर दी और मृगी झाड़ियों में लुप्त हो गई।
कुछ ही देर बाद एक और मृगी उधर से निकली। शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया। तब उसे देख मृगी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया, ‘हे पारधी ! मैं थोड़ी देर पहले ही ऋतु से निवृत्त हुई हूँ। कामातुर विरहिणी हूँ। अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूँ। मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊँगी।’
शिकारी ने उसे भी जाने दिया। दो बार शिकार को खोकर उसका माथा ठनका। वह चिंता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। तभी एक अन्य मृगी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली शिकारी के लिए यह स्वर्णिम अवसर था। उसने धनुष पर तीर चढ़ाने में देर न लगाई, वह तीर छोड़ने ही वाला था कि मृगी बोली, ‘हे पारधी! मैं इन बच्चों को पिता के हवाले करके लौट आऊँगी। इस समय मुझे मत मार।’
शिकारी हँसा और बोला, ‘सामने आए शिकार को छोड़ दूँ, मैं ऐसा मूर्ख नहीं। इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूँ। मेरे बच्चे भूख-प्यास से तड़प रहे होंगे।’
उत्तर में मृगी ने फिर कहा, ‘जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी, इसलिए सिर्फ बच्चों के नाम पर मैं थोड़ी देर के लिए जीवनदान माँग रही हूँ। हे पारधी! मेरा विश्वास कर मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हूँ।’
मृगी का दीन स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई। उसने उस मृगी को भी जाने दिया। शिकार के आभाव में बेलवृक्ष पर बैठा शिकारी बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता जा रहा था। पौ फटने को हुई तो एक हष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया। शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्व करेगा।
शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृग विनीत स्वर में बोला,’ हे पारधी भाई! यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि उनके वियोग में मुझे एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े। मैं उन मृगियों का पति हूँ। यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण जीवनदान देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे सामने उपस्थित हो जाऊँगा।’
मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटना-चक्र घूम गया। उसने सारी कथा मृग को सुना दी। तब मृग ने कहा, ‘मेरी तीनों पत्नियाँ जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएँगी। अतः जैसे तुमने उन्हें विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो। मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूँ।’
उपवास, रात्रि जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया था। उसमें भगवद् शक्ति का वास हो गया था। धनुष तथा बाण उसके हाथ से सहज ही छूट गए। भगवान शिव की अनुकम्पा से उसका हिंसक हृदय कारुणिक भावों से भर गया। वह अपने अतीत के कर्मों को याद करके पश्चाताप की ज्वाला में जलने लगा।
थोड़ी ही देर बाद मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके, किंतु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवं सामूहिक प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसके नेत्रों से आँसुओं की झड़ी लग गई। उस मृग परिवार को न मारकर शिकारी ने अपने कठोर हृदय को जीव हिंसा से हटा सदा के लिए कोमल एवं दयालु बना लिया।
देव लोक से समस्त देव समाज भी इस घटना को देख रहा था। घटना की परिणति होते ही देवी-देवताओं ने पुष्प वर्षा की। तब शिकारी तथा मृग परिवार मोक्ष को प्राप्त हुए।’

Saturday, February 11, 2012

वेलेंटाइन डे क्या है


इश्क है तो इश्क का इजहार करे ,,,,,,,,,,,,,,,


अगर आप किसी से प्यार करते है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,लेकिन आपने अभी तक उससे अपने दिल की बात नहीं कही है तो आज से अच्छा दिन नहीं है इस बात को जाहिर करने का। यूं तो प्रेम किसी वक्त और दिन का मोहताज नहीं होता है लेकिन जब लोगों ने आज का दिन ही प्यार के इजहार के रूप में इंगित कर दिया है तो उस परंपरा को कायम रखते हुए आप इसका निर्वहन बखूबी करें तो  निसंदेह आपका परिणाम काफी अच्छा होगा।  



                                                                                                          
चली इश्क की हवा चली ... चली इश्क की हवा चली ....अपने दिलबर को दीवाना ... ढूदता दिल गली गली... "बागवान फ़िल्म का यह गाना आजकल हर युवा के  सर चदकर बोल रहा है .....


हर किसी की तमन्ना होती है वो अपने प्रेम का इजहार ऐसे करे जैसे पहले किसी ने नहीं किया हो। रील लाइफ और रीयल लाईफ दोनों में अंतर तो होता है लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि आज की रीयल लाईफ पर रील लाईफ का भी काफी असर है। खासकर युवागण तो फिल्मों के मोहपाश में काफी बंधे रहते हैं। इसलिए उनकी पूरी कोशिश होती है कि वो अपने साथी से अपने प्यार का इजहार कुछ इस तरह से करें कि अगले को इंकार करने का मौका ना मिले।


पहले के लोग  खत के माध्यम से अपने इश्क का इजहार करते थे लेकिन आज का वक्त लैपटॉप और टैबलेट का है इसलिए हर काम भी बड़ा फास्ट होता है। अब लोगों को इतंजार करने की आदत नहीं होती है इसलिए वो फास्टफूड की तरह फास्ट रिजल्ट चाहते हैं। आज लोग अपने साथी को गुलाब के जरिये, एसएमएस के जरिये, तोहफे भेजकर अपनी भावनाओं से अवगत करा देते हैं। या फिर कभी-कभी वो इंटरनेट के माध्यम से भी आईलवयू बोल देते हैं।   



हम तो यही कहना चाहते हैं,,,,,,,की  प्यार के ढ़ाई अक्षर  में  बहुत शक्ति होती है अगर दिल से  आप किसी को चाहते हैं और अपनी बात कहते हैं तो आपका साथी आपसे कभी भी  दूर नहीं होगा। तो चलिए आज का दिन आप अपने प्यार के साथ सेलिब्रेट करिये,,,,और  देखिये जिंदगी कितनी हसीन हो जाती है।
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,...................................................................................///////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////////'''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''''';;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;;[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[[]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]]



Wednesday, February 8, 2012

HAMARI KHABAR: Happy Propose Day

HAMARI KHABAR: Happy Propose Day: मोहब्बत का इजहार (1) कुछ लोग यादों को दिल की तस्वीर बनाते हैं, दोस...

Happy Propose Day

मोहब्बत का इजहार

(1)

                                कुछ लोग यादों को दिल की तस्वीर बनाते हैं,
                      दोस्तों की यादों  में महफ़िल सजाते हैं,
                                  हम थोड़े अलग हैं,
                           जो किसी को याद आने से पहले
                           उनको अपनी याद दिलाते हैं



हैप्पी प्रपोज डे...! आपको तो पता ही है कि हम वेलेंटाइन वीक सेलिब्रेट कर रहे हैं। इस वीक का दूसरा दिन है प्रपोज डे। अगर आप किसी से अपने दिल की बात कहना चाहते हैं या फिर रोज डे पर किसी कारण वश आप उनसे अपनी बात नहीं कह पाए हैं तब यह खास दिन सिर्फ आपके लिए है। इस दिन कुछ अलग अंदाज में आप अपने दिल की बात अपने प्रिय तक पहुंचा सकते हैं।

                                           (2)
               कुछ लोग यादों को दिल की तस्वीर बनाते हैं,
                    दोस्तों की यादों  में महफ़िल सजाते हैं,
                                  हम थोड़े अलग हैं,
                        जो किसी को याद आने से पहले
                            उनको अपनी याद दिलाते हैं


जैसे समय के साथ प्रेम की परिभाषा बदली है, ठीक उसी तरह बदलते दौर के साथ-साथ प्यार का इजहार करने के तरीके भी बदले हैं। अब गया वो जमाना जब प्रेमी एक-दूसरे को पत्र लिखकर अपने प्यार का इजहार करते थे

                                        (3) 
                         रोज़ किसी का इंतजार होता है,
                         रोज़ ये दिल बेक़रार होता है,
                           काश के कोई समझ पाता,
                            की चुप रहने वालों को भी
                            किसी से बेहद प्यार होता है...
 


फेसबुक और गूगल की दुनिया में कुछ भी असंभव या दुर्गम तरीका नहीं बचा। इसी कारण आज के प्रेमी अधिक तैयार, अधिक आत्मविश्वासी और अधिक प्रयोगशील हो गए हैं। इन्हीं प्रेमियों के लिए पेश हैं प्रपोज करने के लिए कुछ खास और हटकर तरीके : 

(A)


(B)


(C)


(D)

करीब से तुम्हें देखा तो अपना पाया, 
जब तुम्हें दोस्ती में आजामाया तो अपना पाया, 
तुम्हें क्या नाम दूं समझ में नहीं आता- 
दोस्त, प्यार, जिंदगी या मेरा साया।


अगर  आप के दिल मे प्यार किसी के लिए है ,,,,,,,,,,,,,,,तो 
 प्रपोज जरुर कीजियेगा