Friday, November 30, 2012



पंडित विश्वमोहन भट्ट को 'सत्या फाउंडेशन' ने किया सीधा फोन; रात भर चलने वाले कार्यक्रमों के लिए साउंड प्रूफ सभागार ही उचित

वाराणसी, 1 दिसंबर 2012 
आप मानें या मानें, मगर यह सच है कि देश की सांस्कृतिक धार्मिक राजधानी काशी यानी वाराणसी में लोग रात 10 बजे के बाद शोर-शराबे का इतना जबरदस्त  विरोध कर रहे हैं कि प्रशासन को मजबूर होकर बड़े आयोजकों को कानूनी नोटिस और तमाम मामलों में मुकदमे दर्ज करने पड़ रहे हैं। संशोधित ध्वनि प्रदूषण नियम-2010 के तहत रात 10 बजे ध्वनि-विस्तारक यन्त्र को पूरी तरह स्विच आफ करने के नियम का  कड़ाई से लागू होने से लाखों को फ़ायदा हुआ और अखिलेश सरकार को विद्यार्थियोंमरीजों और वृद्धों की दुआएं मिल रही हैं मगर जिनकी 24 घंटे वाली 'दुकानदारी' चौपट हो रही है वो दूसरों को भी 24 घंटे डिस्टर्ब करने का लाइसेंस फिर से प्राप्त करने के लिए 'परम्परा और संस्कृतिकी दुहाई दे रहे हैं। और वह भी लोगों की नींद और स्वास्थ्य की कीमत पर। वे यह भूल जाए हैं कि अब पुराना जमाना गया। जिन्हें आपका अमृत चाहिए, वे हेडफोन लगाकर यूट्यूब पर या सीडी या मोबाइल पर रात भर बंद कमरे में भी सुन सकते हैं। संगीत और संस्कृति के संवर्धन के लिए लोगों की शान्ति और नींद से खिलवाड़ क्यों?
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पंडित विश्वमोहन भट्ट को सत्या फाउंडेशन ने किया सीधा फोन; कहा रात भर चलने वाले कार्यक्रमों के लिए साउंड प्रूफ हाल ही उचित:

"क्यों विशेष छूट चाहिए? अब यहाँ भी आरक्षण? लाऊडस्पीकर नहीं पहचानता शास्त्रीय और अशास्त्रीय संगीत का अंतर, भट्ट साहब। इस लाऊडस्पीकर पर कुछ भी गाइए या बजाइए, यह रात में गूंजेगा और जब पास के घर में आराम कर रही बीमार माँ कहेगी - "विश्वमोहन, बंद करो  गाना बजाना" तो क्या विश्वमोहन बाबू "परम्परा संस्कृति की रक्षा" के लिए माँ की इच्छा की विपरीत उनको रात भर जगाकर बीमार माँ के कानों में "म्यूजिक थेरैपी" देते रहेंगे? विश्वमोहन जी, रात को स्लीप यानी गहरी नींद ही सबसे बड़ी थेरैपी होती है। जय हिन्द, जय  भारत !!!"
         - चेतन उपाध्याय, सचिव, सत्या फाउंडेशन 
 पं. विश्वमोहन भंट्ट ने रात दस बजे के बाद संगीत आयोजनों पर प्रतिबंध की बाबत कहा कि ध्वनि प्रदूषण बेशक खतरनाक है लेकिन संगीत को इस श्रेणी में नहीं रखना चाहिए। यह हृदय की कोमल भावनाओं से जुड़ा है। इसके लिए छूट दी जानी चाहिए।
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पं. विश्वमोहन भंट्ट जी द्वारा रात 10 बजे के नियम में छूट देने के मुद्दे पर हमने पंडित जी को फोन करके अपना गहरा रोष जताया है। और उनसे अपील की कि लाऊडस्पीकर पर चलने वाले रात भर के कार्यक्रम सिर्फ बंद हालों में ही किये जाएँ नहीं तो रात की नींद खराब होने की दशा में स्थानीय जनता का कोपभाजन बनने के लिए तैयार रहना पडेगा। और कार्यक्रम आयोजकों पर हमेशा कानून की तलवार लटकती रहेगी, वह अलग से।
(चेतन उपाध्याय)
सचिव 
सत्या फाउंडेशन 
09212735622
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Saturday, November 17, 2012


दीपावली पर चटाई बम से वृद्ध व्यक्ति को प्रताड़ित करना पडा महँगा, एसपी के आदेश पर मनबढ़ युवक के खिलाफ दर्ज हुआ मुक़दमा 

वाराणसी, 

एक ऐतिहासिक घटनाक्रम (संभवतः उत्तर प्रदेश में पहला) में वाराणसी पुलिस ने आवासीय एपार्टमेंट के अन्दर तेज आवाज  वाले पटाखों का इस्तेमाल करके एक 71 वर्षीय वृद्ध व्यक्ति को प्रताड़ित करने के आरोप में 37 वर्षीय मनबढ़ युवक के खिलाफ आईपीसी की धारा 290, 291 (6 माह तक की जेल या जुर्माना या एक साथ दोनों सजा) के साथ ही पर्यावरण संरक्षण एक्ट-1986 (1 लाख रुपये तक जुर्माना या 5 वर्ष तक की जेल या एक साथ दोनों सजा) के तहत मुकदमा कायम किया है। 
यह मुकदमा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में संगीत शास्त्र विभाग में अतिथि प्रवक्ता और वर्त्तमान में विराट विला एपार्टमेंट, महमूरगंज (थाना सिगरा) में रहने वाले डाक्टर आदिनाथ उपाध्याय की तहरीर पर कायम किया गया है। 
डा आदिनाथ उपाध्याय सिगरा थाना अंतर्गत महमूरगंज इलाके के विराट विला एपार्टमेंट में रहते हैं। उन्होंने विला के लोगों से लिखित अपील की थी कि दीपावली के दिन एपार्टमेंट के अन्दर आतिशबाजी का प्रयोग न किया जाए। मगर विराट विला में रहने वाले रितेश मेहता ने रात 9 बजे के आसपास डाक्टर उपाध्याय के प्रथम मंजिल फ़्लैट के ठीक नीचे (फ़्लैट से 10 फीट की दूरी पर), चटाई बम बिछाकर उसमे आग लगा दी। इस दृश्य को डाक्टर आदिनाथ उपाध्याय ने खुद अपनी बालकनी से देखा। और इस दीर्घ-कालीन, ताबड़तोड़ बमबाजी  की आवाज और दमघोंटू धुंए ने उन्हें बेहाल कर दिया। किसी तरह पुलिस कंट्रोल रूम के 100 नंबर पर शिकायत दर्ज कराई। और उसके बाद एसपी सिटी श्री संतोष कुमार सिंह के मोबाइल 9454401124 पर सूचना दी। जब मौके पर सिगरा थाने से जुडी नगर निगम पुलिस चौकी के प्रभारी श्री तहसीलदार सिंह पहुंचे, तो चटाई बम अपने शबाब पर था। डाक्टर आदिनाथ उपाध्याय के पारिवारिक मित्र और घटना के गवाह श्री  अशोक कुमार ने बताया कि पूरी बिल्डिंग में सिर्फ कानफाडू शोर और धुंआ था। ऐसा रोंगटा खडा कर देने वाला दृश्य देखकर सब इंस्पेक्टर श्री टीडी सिंह भी सन्न रह गए और उन्होंने तुरंत डाक्टर आदिनाथ उपाध्याय से लिखित तहरीर की मांग की। रात 9.45 पर तहरीर दी गयी और रात 10.30 बजे सिगरा थाने  में 37 वर्षीय श्री रितेश मेहता के खिलाफ नामजद मुक़दमा कायम हो गया। इस संबंध में नगर पुलिस अधीक्षक श्री संतोष कुमार सिंह ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण कानून को पूरी तरह लागू कराने के लिए हमारी पुलिस प्रतिबद्ध है और कानून के मुताबिक़, रात 10 के बाद ही नहीं, बल्कि दिन में भी एक निश्चित सीमा के ऊपर शोर के खिलाफ कोई भी व्यक्ति मुकदमा कायम करा सकता है और इसके लिए सभी थानों के दरवाजे आम जनता के लिए हमेशा खुले हुए हैं। सामान्यतः किसी भी राज्य की पुलिस पर्व-त्यौहार की आड़ में हो रहे ध्वनि-प्रदूषण के खिलाफ एक्शन लेने में संकोच करती है और इसके लिए कानून-व्यवस्था बिगड़ने की संभावना का हवाला  दिया जाता है, मगर मंगलवार को दीपावली की रात हुए इस एक मुक़दमे ने लाखों बेजुबान लोगों को आशा की एक नयी ज्योति दी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि धर्म की आड़ में हो रहे आतंकवाद (तेज शोर करके लोगों को मारना भी तो आतंकवाद ही है) के खिलाफ और लोग भी  खुलकर सामने आयेंगे। 
(चेतन उपाध्याय) 
सचिव, सत्या फाउंडेशन 
09212735622

संलग्न: 
2 पृष्ठ में एफआईआर की प्रति