Saturday, August 25, 2012

गुरु और शिष्य का रिश्ता

 गूरू और शिष्य का जो स्म्र्प्र्न और श्र्दा का है जिसमे सीखना और सीखाना यू गुरु शिष्य का रिश्ता का आधार माना गया गई भारतीय समाज आईएएस रिश्ते को जिस नजरिये से देखता आया हे वह रिश्ता आज बदल गया है गूरू और शिष्य सम्ब्ध को समाज के दूस्जे रिश्ते से अलग रख के नही देखा जाता बदले हूये समय में यह उम्मिद नही कि जसक्ति कि गुरु और छात्र आश्रम विवस्था को ही निभाते है यह सम्बध वेहतर सामाजिक आयामों पर निर्भर करता हे मौजूदा विवस्था गुरु को उसके पेशे के भावीं समाज का रूप है गुरु और शिष्य के भाटार सम्बध समाज को भी बेहतर बना सकते है एक विधयर्थि को अच्छा नागरिक बनाने कि ताकत गुरु के पास ही है 

गुरु गोविंद दोउ खड़े काके लागूँ पाय। 
बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय।


'गु' शब्द का अर्थ है अंधकार (अज्ञान) और 'रु' शब्द का अर्थ है प्रकाश ज्ञान। अज्ञान को नष्ट करने वाला जो ब्रह्म रूप प्रकाश है, वह गुरु है।

वैसे तो हमारे जीवन में कई जाने-अनजाने गुरु होते हैं जिनमें हमारे माता-पिता का स्थान सर्वोपरि है फिर शिक्षक और अन्य। लेकिन असल में गुरु का संबंध शिष्य से होता है न कि विद्यार्थी से। आश्रमों में गुरु-शिष्य परम्परा का निर्वाह होता रहा है।

गुरु क्या है, कैसा है और कौन है यह जानने के लिए उनके शिष्यों को जानना जरूरी होता है और यह भी कि गुरु को जानने से शिष्यों को जाना जा सकता है, लेकिन ऐसा सिर्फ वही जान सकता है जो कि खुद गुरु है या शिष्य। गुरु वह है ‍जो जान-परखकर शिष्य को दीक्षा देता है और शिष्‍य भी वह है जो जान-परखकर गुरु बनाता है।

ND
स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने बहुत प्रयास किए कि नरेंद्र (विवेकानंद) मेरा शिष्य हो जाए क्योंकि रामकृष्ण परमहंस जानते थे कि यह वह व्यक्ति है जिसे सिर्फ जरा-सा धक्का दिया तो यह ध्यान और मोक्ष के मार्ग पर दौड़ने लगेगा।

लेकिन स्वामी विवेकानंद बुद्धिवादी व्यक्ति थे और अपने विचारों के पक्के थे। उन्हें रामकृष्ण परमहंस एक ऐसे व्यक्ति नजर आते थे जो कोरी कल्पना में जीने वाले एक मूर्तिपूजक से ज्यादा कुछ नहीं। वे रामकृष्‍ण परमहंस की सिद्धियों को एक मदारी के चमत्कार से ज्यादा कुछ नहीं मानते थे। फिर भी वे परमहंस के चरणों में झुक गए क्योंकि अंतत: वे जान गए कि इस व्यक्ति में कुछ ऐसी बात है जो बाहर से देखने पर नजर नहीं आती।

तब यह जानना जरूरी है कि आखिर में हम जिसे गुरु बना रहे हैं तो क्या उसके विचारों से, चमत्कारों से या कि उसके आसपास भक्तों की भीड़ से प्रभावित होकर उसे गुरु बना रहे हैं, यदि ऐसा है तो आप सही मार्ग पर नहीं हैं।
गुरु और शिष्य की परम्परा के ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जिससे यह जाहिर होता है कि गुरु को शिष्य और शिष्य को गुरु बनाने में कितनी जद्दोजहद का सामना करना पड़ा।

Sunday, August 19, 2012

अफवाहों का दौर थमा पुलिस ने 16 लोगों को किया गिरफ्तार

बेंगलुरू/ कर्नाटक से पलायन करके पूर्वोत्तर के हजारों लोग शनिवार को असम की राजधानी गुवाहाटी पहुंचे। उधर, पुलिस ने अफवाह फैलाने के आरोप में 16 लोगों को गिरफ्तार किया। सीबीआई ने इस मामले में सात मामले दर्ज किए हैं।

असम में भड़की साम्प्रदायिक हिंसा के बदले पूर्वोत्तर के लोगों को निशाना बनाने की धमकी मिलने और उन पर हमले की अफवाह के बाद पलायन का यह दौर शुरू हुआ। उधर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने असम हिंसा के दोषियों का सुराग देने वालों को एक लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।

पुलिस ने 16 लोगों को बेंगलुरू से गिरफ्तार किया। इसमें से आठ लोगों को एसएमएस एवं एमएमएस द्वारा पूर्वोत्तर के लोगों पर हमले से सम्बंधित अफवाह फैलाने वाले एवं आठ लोगों को हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

बेंगलुरू पुलिस आयुक्त बीजी ज्योतिप्रकाश मिर्जी ने यह जानकारी दी।

गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर असम के शिवसागर जिले के निवासी बितोपन बरुआ ने बताया, "मैं बेंगलुरू में पांच वर्षों से रह रहा हूं। मेरे कुछ मित्रों को स्थानीय अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने हमें 20 अगस्त से पहले बेंगलुरू छोड़ने या फिर परिणाम भुगतने की धमकी दी। हमने तुरंत छोड़ने का निर्णय लिया और 15 अगस्त को बेंगलुरू रेलवे स्टेशन पर खड़ी विशेष रेलगाड़ी में सवार हो गए।"

धीमाजी की दिंगाता पेगू ने बताया, "हमें धमकीभरा कोई फोन नहीं किया गया। कुछ लोग चाकू एवं खंजर लेकर हमारे कमरे पर आए और हमसे 20 अगस्त तक राज्य छोड़ने की धमकी दी। उन्होंने असम में हाल ही में भड़की हिंसा का भी हवाला दिया और गम्भीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी।"

कर्नाटक सरकार ने पूर्वोत्तर के लोगों के लिए तीन विशेष रेलगाड़ियों की व्यवस्था की थी।

लोगों के बड़ी संख्या में आने से पहले से ही बाढ़ एवं नस्लीय हिंसा झेल रही राज्य सरकार के सामने परेशानी बढ़ गई है।

सीबीआई ने शनिवार को असम में भड़की साम्प्रदायिक हिंसा के दोषियों के विषय में सूचना उपलब्ध कराने पर एक लाख रुपये देने की घोषणा की है। सीबीआई असम में बोडो एवं बांग्लाभाषी मुस्लिमों के मध्य भड़की हिंसा की जांच कर रही है।

एक अधिकारी ने कहा, "सूचना विश्वसनीय होनी चाहिए जिसकी सहायता से हम हिंसा के दोषियों को गिरफ्तार कर सकें। सुराग बताने वालों की पहचान गुप्त रखी जाएगी।"

सीबीआई ने बयान में कहा, "जिस किसी के पास भी सूचना हो वह सीबीआई से 8811099997 या फिर 8811099996 पर फोन या फिर एसएमएस कर सकते हैं। सूचनाएं 03664-241253 पर फैक्स की जा सकती हैं।"

एक था टाइगर’ बनने की पूरी कहानी!

फिल्मों की कमाई के मामले में 'दबंग' सलमान खान अब आमिर खान और शाहरुख खान से आगे निकलते दिख रहे हैं। रिलीज के पहले ही दिन सलमान खान की फिल्म ‘एक था टाइगर’ ने 32 करोड़ रुपये छापकर खलबली मचा दी और कमाई का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाने का दावा पेश कर दिया है। यह फिल्म सलमान खान की सबसे बड़ी हिट बनने जा रही है और सलमान बॉलीवुड के सबसे बड़े खान के रूप में उभर रहा है। खबरें तो यह भी आ रही हैं कि रिलीज के दूसरे दिन तक इस फिल्म ने करीब 60 करोड़ की कमाई कर दी थी। जानकार मान रहे हैं कि फिल्म 300 करोड़ की कमाई का आंकड़ा भी छू सकती है। लेकिन कहा जा रहा है कि इस फिल्म के लिए पहली पसंद शाहरुख खान थे, फिर कैसे मिल गया सलमान को मौका? क्या इसमें कैटरीना का कोई गेमप्लान था? जानते हैं पूरी बातें!
सलमान खान का कर्ज उतारा कैटरीना ने,,

कैटरीना कैफ ने कबीर खान की फिल्म ‘एक था टाइगर’ में सलमान खान को हीरो बनवाकर अपना पुराना कर्च चुकता कर लिया। खुद सलमान खान ने इस बात पर मुहर लगाई।

सलमान के अनुसार जब यशराज को फिल्म न्यूयॉर्क में एक हीरोइन की जरूरत थी तो उन्होंने कैट का नाम सुझाया था लेकिन जब ‘एक था टाइगर’ की बात आई तो कैटरीना ने कबीर से सलमान को फिल्म में रखने को कहा।

आश्चर्य की बात ये थी कि ब्रेकअप की खबरों के बीच सलमान ने पहली बार यशराज की फिल्म साइन कर ली।

बदला था लुक 'टाइगर'
'एक था टाइगर' के लिए सलमान ने अपना लुक भी बदला था। सलमान ने अपनी हेयर स्टाइल भी बदल ली थी। नवम्बर 2011 में एक अवार्ड फंक्शन के दौरान सलमान पहली बार इस नयी हेयर स्टाइल में नजर आई थी। इसी दौरान 'बिग बॉस-5' में 'आपका फरमान' की शूटिंग के दौरान उनका हेयर स्टाइल बिल्कुल अलग नजर आया।

यही नहीं, उन्होंने अपने काम करने के अंदाज में भी बदलाव किया है। खबरों के मुताबिक अब वो एक साल में एक ही फिल्म करेंगे।

दरअसल अमेरिका में सितंबर 2011 में हुई सर्जरी के बाद सलमान सीधे शूटिंग के लिए विदेश चले गए थे। हालांकि डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी थी। डबलिन और टर्की में सलमान ने कैटरीना कैफ के साथ फिल्म 'एक था टाइगर' की शूटिंग की।

आदित्य चोपड़ा को माननी पड़ी सलमान की शर्त,
बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान केवल और केवल अपने बनाए नियमों के अनुसार ही काम करते हैं और कोई भी सलमान के काम करने में दखलदांजी नहीं कर सकता है। यशराज फिल्म्स के आदित्य चोपड़ा के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ, जब उन्होंने सलमान को फिल्म ‘एक था टाइगर’ की पटकथा पढ़ने के लिए जोर दिया था।

दरअसल सल्लू को घंटों बैठकर स्क्रिप्ट पढ़ना अच्छा नहीं लगता है, इसलिए जब आदित्य ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा तो ‘दबंग खान’ ने भी एक शर्त रख दी। सलमान ने आदित्य से कहा कि वे उनके साथ बैठकर स्क्रिप्ट पढ़ने को तैयार हैं अगर आदित्य और निर्देशक कबीर खान उनके पनवेल वाले फार्महाउस पर आएंगे। आदित्य के पास और कोई चारा भी नहीं था, इसलिए उन्हें कबीर खान के साथ सलमान के फार्महाउस जाना पड़ा।

सूत्र के अनुसार आदित्य इससे पहले कभी भी अपनी फिल्म के किसी अभिनेता को स्क्रिप्ट पढ़ाने के लिए शहर से बाहर नहीं गए हैं। लेकिन इस बार आदित्य की ‘स्क्रिप्ट रीडिंग’ शहर से बाहर रखा गया।

सूत्रों के मुताबिक सलमान ने अपने सारे संवाद पढ़े और कैरेक्टर को निभाने के लिए तैयार हो गए। वैसे सलमान के इस फार्महाउस पर आना आदि के लिए किसी पिकनिक से कम नहीं था।