Sunday, December 25, 2011

क्रिसमस की हार्दिक बधाई .........................................................................


देश और दुनिया भर में आज क्रिसमस की धूम है। भारत समेत दुनिया भर में क्रिसमस का त्यौहार मनाया जा रहा है। देश की राजधानी दिल्ली, कोलकाता, गोवा, मुंबई, बैंगलोर सहित तमाम छोटे बड़े शहरों में चर्च सजाए गए हैं। शनिवार रात को चर्चों में ईसा मसीह के जन्मदिन के मौके पर प्रार्थनाएं की गईं।
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटील, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने क्रिसमस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को बधाई दी। पाटील ने अपने बधाई संदेश में कहा कि यह आनंद, उल्लास, उम्मीद और खुशहाली का अवसर है। उन्होंने कहा कि मैं क्रिसमस के इस अवसर पर सभी राष्ट्रवासियों को बधाई व शुभकामनाएं देती हूं। प्रभु यीशु के प्रेम, बलिदान, करुणा, सेवा, साहस और मानवता, शांति और सद्भाव के संदेश को प्रकट करता है। मनमोहन सिंह ने अपने संदेश में कहा कि मैं कामना करता हूं कि यह त्योहार दुनियाभर के लोगों के दिलों में खुशियां भर दे और उनमें उम्मीद जगाए रखे                                                                         
उधर ईसाईयों के धर्म गुरू पोप बेनेडिक्ट 16 ने क्रिसमस के व्यावसायीकरण की कड़ी आलोचना की है।क्रिसमस की पूर्व संध्या पर रोम में सेंट पीटर बैसेलिका में आयोजित सभा में उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि इस अवसर को सतही तड़क-भड़क से दूर करके देखें।पोप ने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वो जीजस के जन्म की कहानी पर ही ध्यान केंद्रित करें और सच्चे आनंद व प्रकाश की खोज करें। पूरे विश्व में बढ़ रही हिंसक घटनाओं पर खे़द जताया और ग़रीबी व अभाव की ज़िदगी जी रहे लोगों के लिए प्रार्थना की।

क्रिसमस को बड़ा दिन क्यों कहा जाता है?



भारतीय संस्‍कृति को परंपराओं का संगम कहें । सभी त्‍यौहारों की तरह क्रिसमस यानी बड़े दिन का त्‍यौहार पूरे विश्‍व की तरह भारत भर में मनाया जाता है, मगर क्‍या कभी आपने सोंचा है भारत में क्रिसमस को बडे दिन के नाम से क्‍यों पूकारा जाता है। वैसे तो क्रिसमस को प्रभु ईसा मसीह या यीशु के जन्म की खुशी में मनाया जाता है।

 क्रिसमस को बड़ा दिन कहने के पीछे कई अलग अलग मान्‍यताएं प्रचलित है कहा जाता है।पहले इसे रोमन उत्‍सव के रूप में मनाया जाता था इस दिन लोग एक दूसरे को ढेर सारे उपहार देते थे। जब धीरे-धीरे ईसाई सभ्‍यता पनपने लगी तब भारत में यह दिन मकर संक्रान्ति के रूप में मनाया जाने लगा। इसके अलावा बड़े दिन के पीछे प्रभू ईसा के जन्म से जुड़ी कई कथाएं भी प्रचलित हैं।
25 दिसंबर यीशु मसीह के जन्म की कोई ज्ञात वास्तविक जन्म तिथि नहीं है। एन्नो डोमिनी काल प्रणाली के आधार पर यीशु का जन्म, 7 से 2 ई.पू. के बीच हुआ था भारत में इस तिथि को एक रोमन पर्व यामकर संक्रांति से संबंध स्थापित करने के आधार पर चुना गया है जिसकी वजह से इसे बड़े दिन के नाम से मनाया जाने लगा। वैसे तो पूरी दुनिया में इसे इसे 25 दिसंबर को मनाया जाता है मगर जर्मनी में 
चाहे क्रिसमस कहें या फिर बड़ा दिन कुल मिलाकर इस दिन चारों ओर खुशियां ही खुशियां दिखाई देती है, लोग अपने घरों को सजाते है, गिरजाघरों में प्राथनाएं होती है। 

आपको भी क्रिसमस की हार्दिक बधाई .....................................................................................................................................................................


Thursday, November 24, 2011

जनता के गुस्से का हिंसक अंदाज देखने को मिला











केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार को मंहगााई पर जनता के गुस्से का हिंसक अंदाज देखने को मिला। इफको के एक कार्यक्रम में हरविंदर नाम के एक युवक ने महंगााई से परेशान होकर शरद पवार को जोरदार थप्पड़ मार दिया। साथ ही युवक ने चाकू भी दिखाया लेकिन जल्द ही युवक पर काबू कर उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। करीब सभी मंत्रियों ने इस घटना ही ंनंदा की तो वही इस घटना पर रालेगण में जब अन्ना हजारे से पत्रकारों ने उनकी प्रतिक्रिया लेनी चाही और अन्ना से सवाल किया कि शरद पवार को दिल्ली में एक युवक ने थप्पड़ मारा है, इस पर आप क्या कहना चाहेंगे, तो इस पर अन्ना ने हैरानी के साथ कहा, ‘थप्पड़ मारा ? एक ही थप्प्ड़ मारा ?
शरद पवार इफको के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने गुरूवार को एनडीएमसी के कन्वेंशन सेंटर पहुंचे थे। कार्यक्रम खत्म होन के बाद वह मीडिया से बात कर जैस ेही आग ेबझ़े एक युवक ने ये कहते हुए कि देश में गुस्सा है, जोरदार थप्प्ड़ मार दिया। युवक के तेवर एकदम उग्र थे और इसी युवक ने पिछले शनिवार टेलीकॉम के पूर्व तंत्री सुखराम को भी थप्पड़ मारा थां। युवक का कहना है कि वह महंगााई पर शरद पवार के बयान से नाराज था। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने इस युवक को पकड़ लिया और जब उस से ये पूछा गया कि उसने ऐसा क्यों किया तो उसका जवाब था कि और क्या कंरू, जहां देखो ंवहां घोटाला,घोटाला। दो दिन पहले भाजपा नेता यशवंत सिंहा ने कहा था कि महंगााई को लकर लोगों का गुस्सा बढ़ सकता है और हिंसा भी हो सकती है जिसका रूप शरद पवार पर हुए हमले से सामने आ गया

Sunday, September 11, 2011

दिल्ली हाईकोर्ट-गेट नं. 5 की तस्वीरें।

नई दिल्ली।दिल्ली  उच्च न्यायालय के गेट नम्बर पांच के बाहर बुधवार सुबह हुए विस्फोट में कम से कम14 लोग मारे गए और 80 लोग घायल हो गए। बम ब्रीफकेस में छुपाकर रखा गया था। केंद्रीय गृह सचिव आर.के. सिंह ने बताया कि यह विस्फोट उच्च न्यायालय परिसर के गेट नम्बर पांच के बाहर सुबह करीब 10.30 बजे हुआ।
उस समय वहां काफी भीड़भाड़ थी और न्यायालय परिसर में दाखिल होने की प्रतीक्षा कर रहे लोगों की लम्बी कतार लगी हुई थी।
 
बम धमाके की लाइव तस्वीरें
1.
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गृह मंत्रालय ने दिल्‍ली धमाके के पीछे आतंकियों का हाथ बताया 

                      

Monday, April 25, 2011

सत्य साईं बाबा ने ली दुनिया से विदाई

1 . सत्य साईं बाबा ने ली दुनिया से विदाई 


  आध्यात्मिक  गुरु सत्य साईं बाबा दुनिया मे नहीं रहे  .सत्य साईं बाबा ने रविवार सुबह 7:40 बजे उन्होंने नेअंतिम सासे ली                                                                                                     
 दिल का दौरा पड़ने से हुआ  देहांत |  पुरे देश मैं शोक की लहर दोड़ गई है | पुत्तापर्थी मार्केट शहर पूरा बंद हो चूका है  हर तरफ शोक की लहर है |
सत्य साई बाबा की हालत अत्यंत गंभीर पहले से २८ मार्च २०११ को  अस्पताल में भर्ती कराया गया था. और उनके सभी अंगों पर इलाज का बेहद मामूली असर हो रहा है.




2 .सत्य साईं बाबा का जिगर काम नहीं कर रहा है और रक्तचाप लगातार निम्न बना हुआ है जिसकी वजह से डॉक्टर बेहद चिंतित हैं.’

उन्होंने कहा कि सत्य साई बाबा कृत्रिम श्वांस यंत्र की मदद से सांस ले रहे हैं और उनके गुर्दों के लिए आज सुबह हीमोडायलिसिस की धीमी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.




3 .सत्य साईं बाबा के बारे मे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,


  • सत्‍य साईं का जन्‍म 23 नवंबर, 1926 को
  • आंध्र प्रदेश के पुट्टापर्थी में हुआ था. जिस
  • घर में सत्य साईं का जन्म हुआ, वो घर
  • अब एक मंदिर बन गया है.
  • सत्यनारायण राजू ने 14 साल की उम्र में
  • ही अपने माता-पिता और घर को छोड़कर
  • धार्मिक जीवन की राह पकड़ ली थी. चार
  • साल भ्रमण के बाद जब वो लौटे, तो उन्होंने
  • छह साल तक घर में रह कर साधना की, पर
  • जैसे-जैसे उनका यश फैलता गया, ये जगह 
  • छोटी पड़ती गयी.
  • बाद में यहां से कुछ किलोमीटर की दूरी 
  • पर साईं बाबा का मौजूदा आश्रम प्रसांथी
  • निलयम बनाया गया. जब सत्य साईं की 
  • तबीयत बिगड़ी, तबसे यहां पर दिन-रात 
  • देसी-विदेशी भक्तों की मौजूदगी में लगातार
  • भजन और कीर्तन जारी है.
  • 4. सत्य साईं के अंतिम दर्शन
सत्य साईं बाबा के अंतिम दर्शन के लिए भक्तजनों का तांता लगना शुरू हो गया है।  तेंदुलकर ने आज बाबा के नम आखों से श्रद्वासुमन अर्पित किए। सचिन के साथ उनकी पत्नी अंजली भी साथ थी।  सत्य साईं बाबा के अवसान से दुखी  सचिन तेंदुलकर ने रविवार को अपना 38वां जन्मदिन नहीं मनाया था। बाबा के अनन्य भक्त सचिन ने यह शोक समाचार सुनते ही खुद को होटल के कमरे में बंद कर लिया था। उनके साथ उनकी पत्नी और दोनों बच्चे भी मौजूद थे। सचिन के कमरे के बाहर डू नॉट डिस्टर्ब का बोर्ड लगा दिया गया। होटल सूत्रों ने बताया कि सचिन ने नाश्ता भी नहीं लिया। इसके अलावा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी  सत्य साईं बाबा के दर्शन करेंगे। 

5 . सत्य  साईं बाबा के भक्त ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,


  1 . 


                   सत्य साईं का आशीवार्द लेते कलाम


2 .


                           सत्य साईं का आशीवार्द  हुए  सचिन 


सत्य साईं  बाबा 23 -11 -1926  से 24 -04 -2011    
                        

Saturday, April 23, 2011

परीक्षा

उठकर छात्रों  मेहनत  कर लो ,और परीक्षा पास करो !!

थोडा घूमना कम करो ,थोड़ा खाना  कम करो 
मेहनत करना सीखो प्यारे ,बात बनाना बन्द करो !!

नकल और बेईमानी पर ,कभी नहीं तुम आस करो 
अपनी उन्नति चाहो तो तुम ,मेहनत पर विश्वास करो !!

खेलो  हसो  उठो और बेठो ,एक साथ इस उपवन  मे
छोटा बड़ा नहीं है कोई भेद न जानो अपने मन मे !!

उन्नति पथ पर बढने वाले ,कभी नहीं रुक सकते 
जो दिल मिल रहे है आपस मे वे दूर नहीं हो सकते है !!

इस बगिया के नहे फूलो ,इस बगिया को महकाना है 
स्कूल और अपने गुरुजन का ,तुम सबको  मान बढना है 

Tuesday, April 19, 2011

आतंकवाद का धर्म


आतंकवाद  का धर्म जति से कोई वास्ता नहीं होता है ,कोई सरोकार नहीं , दो बिल्कुल अलग चीजे है !एक धामिक इन्सान कभी दरिंदा नहीं बन सकता . मगर  आज जब की इंसानियत तबाह हो चुकी है या फिर हो रही है या फिर इतिहास अपने को दुहरा रहा है वषों साल पहले इन्सान जानवरों जेसी जिन्दगी गुजारता था !उसकी आदते भी लगभग  वैसी ही थी फिर देवी देवता अवतार व् पैगम्बर आते रहे और इन्सान की जिन्दगी संवरती रही !यह सिलसिला जारी रहा और इन्सान सही मायनो मे इन्सान बन गया !लेकिन इस संघर्ष जीवन मे धीरे -धीरे उसकी दिमागी उलझने बढती गई और उसकी आध्यात्मिक  ताकते कमजोर होती गई और वह अपनी मंजिल से बेखबर होता गया !इसमे कमज़ोरिया बढती गयी ! शेतानी ताकते जो दिल व् दिमाग के किसी कोने मे सिसक रही थी ,कराह रही थी और ताकत बनकर इन्सान पर छा गयी और आज के दौर मे इन्सान एक बेरहम दरिन्दे की शक्ल मे आ गया !कितनी अफ़सोस की बात है !हमारी जिन्दगी जीने का स्तर इस हद तक गिर चूका है , हम इस कदर जलील हो गये है की मन्दिर , मस्जिद गुरुदारा का सम्मान भी भूल गये है ! मदों ,औरतो बच्चो  मासूम  को निशना बनते है मंदिर मे जहा ईश्वर की पूजा होती है वही देवी -देवता पर फूल चढाये जाते है लोग अपनी आत्माओ की शांति के लिए जाते है वहा हम बम विस्फोट करके इन धर्मिक लोगो की जिन्दगिया छीन लेते है इनकी  ऐसी हरकतों से इस्लाम बदनाम हो रहा है ! एक सच्चा मुसलमान सही मायनो मे खुदा का फरमाबरदार है और गुलाम है !हर जगह पर कुदरत ने इसके लिये हुक्म दिये है खाने मे .पीने मे उठने मे बेठने मे मोहल्ले / पड़ोसियों के हक यानि की लड़ाई  झगड़े मे एहतियात पर जोर दिया गया है इस्लाम नाम है गरीबो और बेसहारा लोगो पर हाथ रखना लेकिन अफ़सोस है की यह सारी खुबिया हमने खो दी !अभी तक वारदात होई है उस इस्लाम का हाथ होता  है !इसमे हमारे हिन्दू भाइयो  ने जिस कदर समझबूझ और सब्र से कम लिया इसकी जितनी भी तारीफ की जाये कम है यह इनकी कमजोरी नहीं बड़ाई है ! लेकिन जिन्दगी और मौत का सवाल यह तो भगवान के हाथ मे है! मौत  किसे और किस समय आयगी किसी की नहीं मालूम ! हमारा मजहब अपनी खूबिया की वजह से सम्मान की द्रष्टि दे देखा जाता था !आज मुसलमान आतकियो के नाम से मशहूर है ! क्यों लोग नफरत की नजर से देखते है क्यों मारो भगाओ के नारे बुलंद होते है ! इसका सबब है मजहब से दूरी और गुमराही हमारा  जमीर हमे गलत रह दिखाता है हमारे  दिमाग की सोच कही गहराई मे गम हो गई लेकिन इसका मतलब यह नहीं की हम हमेशा इस जहरआलूद जिन्दगी मे जुल्म व् बेरहमी का शिकार होते रहेगे अपने देशो की हिफाजत हमारा फर्ज है हमारा ईमान है , मजहब से हमे हुक्म मिला है !हम आपस मे लड़ते झगड़ते है फिर मिलते है क्या भाई भाई नहीं लड़ते लेकिन कोई बाहरी  हम से लड़ने आता तो एक हो जाता हूँ  हम सब हिम्मत व् हौसले से काम लेगे !हम आपस मे भाईचारा भरोसा और विश्वास को बनाए रखेगे !जब हम सब एक रहेगे दहशतगदी खुद अपनी मौत मर जायेगी फिर  बेगुनाहों का खून नहीं बहाया जा सकेगा फिर कभी भी मन्न्दिरो मस्जिद और गुरुदारो मे विस्फोट नहीं होगा !हम सब मिलकर अपने-अपने धर्म की  अच्छाइयो  अ प्रचार करे सभी धर्म मिलकर कोशिश और मेहनत करे  मेहनत कभी भी बेकार नहीं जाती अगर लग्न से जाये !हम सब की राहे अलग -अलग है लेकिन मंजिल सबकी एक है 


                                               (आतंकवाद का धर्म )

नेता जी कहते है



श्री मान आप लोगो का वोट यदि पायेगे
केहू जोवन  किया अहि क्र के दिखायेगे  !
                                       
                                           बक -बक करो मत विचार सुओ मोरा ,
                                            हर हार मे करवा दुगा रोजगार थोडा !
                                            कोने -कोने बिजली का तार दौरायेगे ,
                                            केहू जोवन  किया नहीं कर के दिखायेगे !!
फ्री मे पढ़ाई होगी ,फ्री मे दवाई ,
गाव गाव रोड चक रोड बन जाई !

                                              वृद्धा पेशन बुड्ढा और बुड्ढी को दिलायेगे ,
                                              केहू जोवन  किया नहीं कर के दिखायेगे !
                                              फिर नहीं होगी जोवन भाई हमसे गलती ,
                                              का करे सरकारे जब मार दिया पल्टी !!
गाव की बात जाकर दिल्ली मे उठायेगे  ,
केहू जोवन किया नहीं कर के दिखायेगे !!
    


                           (यह वोट के पहले  नेताओं  की बाते है )

Thursday, April 7, 2011

अन्ना हजारे के बारे मे

अन्ना  हजारे  का  जन्म  १५  जून  १९३८  को  महाराष्ट्र  के       

अहमदनगर  के  भिगर  कस्बे  मे  हुआ  अन्ना  हजारे  का  असली
  
नाम   डॉ  किसन  बाबूराव  हजारे  है  अन्ना  का  बचपन  बहुत  ही 

गरीबी  हुआ  अन्ना  हजारे  के  पिता   मजदूरी  करते  थे  और 

 अन्ना  हजारे  के  बाबा  फौजी  थे  अन्ना  ६  भाई  थे  अन्ना  का 

परिवार  बहुत  गरीब  था  अन्ना  हजारे  परिवार  मे  गरीबी  और

 खाने  पीने  तगी  देख  कर  अन्ना  की  बुआ अन्ना  को  मुंबई  ले

 गई  और  वह  अन्ना  ने  सातवी  तक  पढ़ाई  की  और  अन्ना  

हजारे  अपनी  बुआ  के  परिवार  मे  बोझ  देखकर  वह  फूल  की  

 दुकान  पर  काम  करने  लगे  जहा  उन्हें  ४०  रुपया  मजदूरी  

मिलती  थी  और  उस  के  बाद  अन्ना  हजारे  ने  फूल  की  दुकान 

खोल  ली  और  अपने  पास  दो भाई  को  बुला  लिया  अन्ना  हजारे 

इसाफ़  की  लड़ाई  लड़ने  से  पहले  सीमा  पर  देश  के दुश्मनों  से 

मुकवला  कर  चुक  है  सन १९६२  मे  चीन  लड़ाई  के  बाद  भारत     

 की  युवाओं  की  सेना  मे  भाति  हुए  लोग  अन्ना  हजारे  को   

गांधी  भी  कहते  है  और  अन्ना  हजारे  ने  १९७०  मे  उन्होंने 

आजीवन  अविवाहित  रहने  का  सकल्प  किया  अन्ना  हजारे  की 

जन्मू  पोस्टिंग   के  दौरान  १५  साल  मे  पूरे  होने  पर  १९७५  मे 

उन्होंने  वी  आर  एस  ले  लिया  और  अन्ना  हजारे  अपने  गाव  मे 

आकर  डट  गये  और  अन्ना  हजारे  ने  अपने  गाव  की  तस्वीर

 बदल  दी  और  हजारे  ने  अपनी  जमीन  बच्चो  के  हास्टल के  

लिए  दान  मे  दे  दी . अन्ना  हजारे  का  आज  भी  पेशन  का  पैसा 

उनके  गाव  के  विकास  के  लिए  खर्च  होता  है  वह अपने देश  के 

लिए  राम  है  और वह  अपनी सेना  के  साथ  मुहीम  पर  निकल 

चुके  है . अन्ना  हजारे  भ्रष्टाचार  के खिलाफ मुहिम चला  रहे है 

अन्ना हजारे भ्रष्टाचार के विरोध और जन लोकपाल बिल के लिए 

अपने हजारो सहयोगियों के दिल्ली के जन्तर मंतरपर अन्य त्याग 

मुहिम पर बेठ गये है अन्ना हजारे चाहते है  की देश मे जो भ्रष्टाचार 

हो रहा है 

उस सरकार जन  लोकपाल बिल तुरत लाये और लोकपाल की 

सिफरिशे आनिवार्य  तोर पर लागू हो और लोकपाल को जजों सासदो 

.विधायक आदि  पर भी मुकदमा चलाने का आधिकार हो अन्ना  

हजारे अपनी  मुहिम पर दते हुए है //////////////////////////////////


अन्ना हजारे सघर्ष करो : देश तुम्हारे साथ  है 

                                                 भारत  मे भ्रष्टाचार का अन्त करो