आतंकवाद का धर्म जति से कोई वास्ता नहीं होता है ,कोई सरोकार नहीं , दो बिल्कुल अलग चीजे है !एक धामिक इन्सान कभी दरिंदा नहीं बन सकता . मगर आज जब की इंसानियत तबाह हो चुकी है या फिर हो रही है या फिर इतिहास अपने को दुहरा रहा है वषों साल पहले इन्सान जानवरों जेसी जिन्दगी गुजारता था !उसकी आदते भी लगभग वैसी ही थी फिर देवी देवता अवतार व् पैगम्बर आते रहे और इन्सान की जिन्दगी संवरती रही !यह सिलसिला जारी रहा और इन्सान सही मायनो मे इन्सान बन गया !लेकिन इस संघर्ष जीवन मे धीरे -धीरे उसकी दिमागी उलझने बढती गई और उसकी आध्यात्मिक ताकते कमजोर होती गई और वह अपनी मंजिल से बेखबर होता गया !इसमे कमज़ोरिया बढती गयी ! शेतानी ताकते जो दिल व् दिमाग के किसी कोने मे सिसक रही थी ,कराह रही थी और ताकत बनकर इन्सान पर छा गयी और आज के दौर मे इन्सान एक बेरहम दरिन्दे की शक्ल मे आ गया !कितनी अफ़सोस की बात है !हमारी जिन्दगी जीने का स्तर इस हद तक गिर चूका है , हम इस कदर जलील हो गये है की मन्दिर , मस्जिद गुरुदारा का सम्मान भी भूल गये है ! मदों ,औरतो बच्चो मासूम को निशना बनते है मंदिर मे जहा ईश्वर की पूजा होती है वही देवी -देवता पर फूल चढाये जाते है लोग अपनी आत्माओ की शांति के लिए जाते है वहा हम बम विस्फोट करके इन धर्मिक लोगो की जिन्दगिया छीन लेते है इनकी ऐसी हरकतों से इस्लाम बदनाम हो रहा है ! एक सच्चा मुसलमान सही मायनो मे खुदा का फरमाबरदार है और गुलाम है !हर जगह पर कुदरत ने इसके लिये हुक्म दिये है खाने मे .पीने मे उठने मे बेठने मे मोहल्ले / पड़ोसियों के हक यानि की लड़ाई झगड़े मे एहतियात पर जोर दिया गया है इस्लाम नाम है गरीबो और बेसहारा लोगो पर हाथ रखना लेकिन अफ़सोस है की यह सारी खुबिया हमने खो दी !अभी तक वारदात होई है उस इस्लाम का हाथ होता है !इसमे हमारे हिन्दू भाइयो ने जिस कदर समझबूझ और सब्र से कम लिया इसकी जितनी भी तारीफ की जाये कम है यह इनकी कमजोरी नहीं बड़ाई है ! लेकिन जिन्दगी और मौत का सवाल यह तो भगवान के हाथ मे है! मौत किसे और किस समय आयगी किसी की नहीं मालूम ! हमारा मजहब अपनी खूबिया की वजह से सम्मान की द्रष्टि दे देखा जाता था !आज मुसलमान आतकियो के नाम से मशहूर है ! क्यों लोग नफरत की नजर से देखते है क्यों मारो भगाओ के नारे बुलंद होते है ! इसका सबब है मजहब से दूरी और गुमराही हमारा जमीर हमे गलत रह दिखाता है हमारे दिमाग की सोच कही गहराई मे गम हो गई लेकिन इसका मतलब यह नहीं की हम हमेशा इस जहरआलूद जिन्दगी मे जुल्म व् बेरहमी का शिकार होते रहेगे अपने देशो की हिफाजत हमारा फर्ज है हमारा ईमान है , मजहब से हमे हुक्म मिला है !हम आपस मे लड़ते झगड़ते है फिर मिलते है क्या भाई भाई नहीं लड़ते लेकिन कोई बाहरी हम से लड़ने आता तो एक हो जाता हूँ हम सब हिम्मत व् हौसले से काम लेगे !हम आपस मे भाईचारा भरोसा और विश्वास को बनाए रखेगे !जब हम सब एक रहेगे दहशतगदी खुद अपनी मौत मर जायेगी फिर बेगुनाहों का खून नहीं बहाया जा सकेगा फिर कभी भी मन्न्दिरो मस्जिद और गुरुदारो मे विस्फोट नहीं होगा !हम सब मिलकर अपने-अपने धर्म की अच्छाइयो अ प्रचार करे सभी धर्म मिलकर कोशिश और मेहनत करे मेहनत कभी भी बेकार नहीं जाती अगर लग्न से जाये !हम सब की राहे अलग -अलग है लेकिन मंजिल सबकी एक है
(आतंकवाद का धर्म )

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