Saturday, March 12, 2011

प्रलय : क्या २०१२ की शुरुआत हो चुकी है

 पिछले वर्ष रिलीज हुई फिल्म २०१२ देखने के बाद ये विश्वास करना मुश्किल साबित हो रहा था 
लेकिन जो जापान मै आयी सुनामी को देखने के बाद आप ये कहे सकेत है क़ि २०१२ क़ि शुरुआत हो चुकी है 
जापान के उत्तरपूर्वी तट पर  ११मार्च २०११ को एक के बाद आय भूकप के झटको ने तबाही मचा दी . जापान मे भूकप के केन्र्द के पास सुमुर्दी तट पर आई सुनामी लहरों मे घर कारे. बस और छोटी बड़ी नोकाए बह गई.जापान मे आये भूकप के बाद ५० देशो मे चेतावनी जारी कर दी गई भयानक भूकप और फिर ३३ फिट ऊची सुनामी लहरों ने शुकवार को जापान को हिला रख दिया 
इसे पिछले १०० साल मे आया जापान का सबसे बड़ा भूकप माना जा रहा है इस जापान के भूकप मे हजारो लोग मर गये है पहले पानी और फिर आग से तबाही और जापान मे चारो तरफ मची अफरा तफरी मे सडक पर निकली कारे सुबह से रात तक जनजीवन ठप हो गया और उधर जापान के रिफ़ाइनरी मे आग लगी इस आग क़ि चपेट मे आसपास का काफी बड़ा इलाका आ गया और भयानक तबाही मच गई इस आग को बुझाने का भी कोई उपाय न था  जापान के आलाव और देशो मे चेतावनी जारी कर दी गई अमेरिका रूस फिलिपिस और इदोनोशिया सहित ५० देशो ने सुनामी चेतावनी जारी कर दी येसे मे याद आता है वर्ष २००४ मे जो क़ि भारत मे भूकम्प आया था जिसमे मरे गये लोग क़ि सख्या दस हजार थी और पचासों हजार जनसख्या प्रभवित हुई थी 
ऐसे  मे जापान मे आई सुनामी से सवाल उठने लगे है क़ि सुनामी और ज्वालामुखी कब और किसका क्षेत्र होगा ये नहीं मालूम ऐसे सवाल गभीर हो जाते है क़ि हम सुरक्षित नहीं है लेकिन ये सच मालूम हो रहा है क़ि २०१२ को दुनिया खम्म हो जायेगी
ये जापान मे सुनामी भूकप के बाद सच मालूम हो रहा है लेकिन मै नहीं कह रहा हू .ये तो जापान मे आये सुनामी भूकप पर सवाल उठते है ........................
(१)       जापान मैं आये सुनामी भूकप के बाद २०१२ का सच है ....................
(२)      ५० देशो मे चेतावनी जारी ................................
(३)       क्या २०१२ मे दुनिया का अन्त हो जायेगा ..........
               कपया अपनी राय जरुर लिखे ...............................................................................

असली अपराधी कौन शातिर बदमाश विनय की हत्या का

हरदोई शाहाबाद (उप)
शाहाबाद मो० पाठकना निबासी २० सेप्टेम्बर  दिन सोमबार को बिनय कुमार मिश्रा को गोली लगने से  मौत हो गई . इसे हत्या मानते हुए पुलिस  ने विनय के दो दोस्त को चौक  निवासी विशाल रस्तोगी  और  धीरू वाजपई को हिरासत में ले कर जेल भेज  दिया.
    इससे  पहले लगभग दो वर्ष पूर्व विनय  के बड़े  भाई संजय उर्फ़ मुतरंजन  को भी मझिला (हरदोई) पुलिस ने आलमनगर गाँव  में एक मुठभेड़  के जरिये बेरहमी से मार दिया गया  था .
    विनय चार भाई था  सबसे बड़ा संजय  था .दुसरे नंबर का विनय कुमार  जिनकी हत्या कर दी गयी .अब चार भाइयो  में  दो भाई हैं .प्राप्त जानकारी के आधार पर मुतरंजन  की हत्या  के बाद विनय की निगाहें  उनपर थी  जो की उनके भाई मुतरंजन की हत्या की थी लेकिन विनय के दोस्त धीरू बाजपाई  और विशाल रस्तोगी  के जरिये भेदने में  सफलता प्राप्त की  प्राप्त जानकारी के आधार पर विनय की हत्या के दिन  जिला मुख्यालय  पर बांछित  मुकदमो के सिलसिले में  अदालत में आत्म समर्पण करने वाला था विनय के वकील आलोक श्रीवास्तब के माध्यम से समर्पण की प्रक्रिया  भी  पूरी कर ली थी 
     चर्चाओं और चास्म्दिदों के आधार पर विशाल और धीरू विनय को लेकर चौक स्थित मकान में आये और तीनो में मौज मस्ती हुई और खाना पीना हुआ कहा जाता हे धीरू ने पुलिस  को अपने घर होने की खबर दी तभी पुलिस वहां पहुची और कहा जाता हे की मकान को घेर लिया जाता हे आननफानन में  कुछ देर फयरिंग भी हुई  जब पुलिस मकान के अन्दर पहुंची तो उसे विनय की लाश मिली उसके सर के पीछे गोली लगी थी .विनय के पास से एक तमंचा भी मिला पुलिस ने पहले इसे आत्मा हत्या के मामला बनाने की कोशिश  की  लेकिन बढते आक्रोश के कारण  व् परिस्थितियों के चलते  विनय की हत्या का अपराधी विशाल और धीरू बाजपाई को हिरासत में ले लिया दोनों के विरुद्ध हत्या के मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया  
सूत्र से प्राप्त जानकारी के आधार पर इसे साजिश के तहत हत्या का  मामला माना जा रहा हे विशाल और धीरू के बदहा वासी भरे शब्दों के अनुसार मुतरंजन की हत्या की साजिश से जोड़ कर देखा जा रहा हे 
जानकारी के अनुसार धीरू ने जब पुलिस को सूचित किया और पुलिस बल रबाना हुआ उसके कुछ चंद मिनटों बाद ही हरदोई की मिडिया से नगर में पुलिस से बदमाशों  की  मुठभेड़ होने की स्तिति की जानकारी शाहाबाद की मीडिया से जनि गई शाहाबाद के निवासियों का कहना हे बदमाश ओ मार गिराने का काम पुलिश ने अपने खाते में इंट्री दर्ज क्यों नहीं की आखिर असली अपराधी कौन 
  या फिर विनय ने आत्मा हत्या की या की पुलिस की मुठभेर में मारा गया या धीरू और विशाल ने ही मार डाला 
   शाहाबाद समाचार के अनुसार धीरू बाजपाई चिल्ला चिल्ला कर कह रहा था की बब्बू ने पहले मुतरंजन को मरवा दिया अब विनय जो विधायक बब्बू का दुसमन बना हुआ था वहीँ विधायक बब्बू ने विनय को भी ठिकाने लगा दिया धीरू तो पुलिस के हिरासत में यही बकता रहा और बब्बू से बात करने की गुहार लगाता  रहा .सच क्या हे यह तो विशाल और धीरू बता सकते हें जानकारी के अनुसार मुतरंजन की हत्या के बाद ही अपनी सुरक्षा के प्रति बब्बू ने विनय व् दो अन्य ब्यक्तियों से अपने को खतरा बताते हुए अपनी सुरक्षा ब्यबस्था चौकस कर ली थी 
लेकिन यहीं पर शाहाबाद की जनता में एक सबाल उठता हे कि
 विनय कुमार मिश्रा का असली अपराधी कौन ...............

Friday, March 11, 2011

सियासत इस वतन की इस कदर गंदी ना थी पहले



पिछले दिनों मैं एक लोक संगीत कार्यक्रम में गया और वहां पर एक भोजपुरी लोक गायक से मिला। पहले तो मैं रंगा रंग कार्यक्रम का लुत्फ़ उठाया और लौटते समय सोचा क्यूं ना इससे पूछूं भैय्या बीजेपी के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने लालू और मुलायम जी को कुछ ......शब्दों से संबोधित किया है। सो निकलते समय मैंने पूछ ही लिया। गायक का जवाब काफी दिलचस्प था, उसने जवाब कुछ यूं दिया बोला भैय्या मत पूछो ये सब सियासत का खेल है कोई पास तो कोई फेल है। ये सब आपस में एक दुसरे के भाई बंधू हैं, बात तो सिर्फ इतनी ही न थी भैय्या की लालू और मुलायाम जी ने महंगाई के मुद्दे पर सिर्फ दहाड़ लगाकर अपना कोरम पूरा किया और बाद में मामला ठंढा पड़ते ही यूपीए सरकार के साथ हो लिए। लेकिन बीजेपी के नए नवेले दुल्हे को यह नागवार गुज़रा और कह दिया "पहले तो शेर की तरह दहाड़ लगा रहे थे और अब.....की तरह तलवे चाटने लगे हैं" तो इस में गलत ही क्या कहा सही ही तो कहा है। पर भैय्या इसमें लालू और मुलायम जी का भी कहाँ दोष है, कहते हैं ना भैय्या "जिसकी लाठी उसकी भैंस" अब अगर लाठी कांग्रेस के हाथ में है तो कौन जानता है की सीबीआई का डंडा कब इनके सिर पड़ जाए तो ऐसे हालात में भैय्या कोंग्रेस की ही जय-जय कर करने में भलाई है। आगे लोक गायक कुछ रुंधे हुए स्वर में कहता है की भैय्या हम लोगन के ऐसे विवाद से का लेवे देवे का है। हम तो रोज कुंवां खोदते हैं और रोज़ अपनी प्यास बुझाते हैं। हम गरीबन का कौन सुनता है भैय्या, हम गरीब भूखे बिलखते रहते हैं और जब आपन बच्चन का हम लोगन से तड़प नाहीं देखी जाती तो हम आत्महत्त्या करने के लिए मज़बूर हो जाते हैं। आप ही देखो ना भैय्या यह कैसा अपवाद है कि इस देश में पहले तो चीनी १२.५० रूपया प्रति किलो से एक लाख टन निर्यात किया जाता है और फिर उसी चीनी को ४८ रुपया प्रति किलो के भाव से आयात किया जाता है और फिर हम लोगन को इतने महंगे दामों पर खरीदना पड़ता है। इस देश के कृषि मंत्री कहते हैं की हर साल ५८००० हजार करोड़ रुपए का अनाज सरकारी गोदामों में ही सड़ जाता है और हम गरीब एक-एक दाने के लिए मोहताज़ रहते हैं।
गायक की यह सारी बातें सुन कर मैं भी ग़मगीन हो गया सोचा क्यों ना माहौल को थोड़ा ठंढा करते हैं। मैंने गायक से कहा चलते-चलते भोजपुरी लोक संगीत की कुछ लाइनें सुना दो। गायन सुनाने से पहले बोला भैय्या तो इन नेता परेता लोगन के चक्कर में नहीं पड़ो तो अच्छा है। भैय्या जिस बीजेपी के अध्यक्ष को महंगाई के बढ़ने से आम जनता की इतनी चिंता हो रही है की संसद में वोटिंग भी कराने से पीछे नहीं हटे, उसी बीजेपी की सरकार में सन १९९८ में माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के कार्यकाल में प्याज और नमक के दाम आसमान छू रहे थे। गायक बोला उसी ज़माने में मैंने एक सुपर डुपर हिट धुन बनाई थी कहो तो सुनाऊँ, मैंने कहा ज़रूर, पहले तो उसने हारमोनियम से बहुत उम्दा धुन निकाल कर पुरे वातावरण में मीठास घोल दी और आगे की लाईने कुछ यूं सुनाई "बाहरे अटल चाचा निमक खातिन मार हो गइल-२ अउर पियजिया अनार हो गइल........पियजिया अनार हो गइल......" यह सच है कि इस लोक गायक ने हमारे नताओं का सत्ता की लोभ में किजानेवाली ओछी राजनीति का काला चिठ्ठा खोल कर रख दिया। किसी नें कहा है कि,
"सियासत इस वतन की इस कदर गंदी ना थी पहले, रिदाए मादरे हिंदुस्तान मैली ना थी पहले मगर पहले सियासत में लफंगे भी ना आये थे, गली के चोर उचक्के जेब कतरे भी ना आये थे।
शरीफ इंसान जो होता था पहनता था वही खद्दर, जो बा इज्ज़त हुवा करता था बनता था वही लीडर।
मगर अब तो शरीफ इंसान की गुंजाईश बहुत कम है, सियासत में वही आता है जिसके हाथ में बम है॥ "
आज हमारे देश में राजनीति का स्तर दिन प्रति दिन गिरता चला जा रहा है। मामला चाहे रीता बहुगुणा जोशी का मायावती जी को अपशब्दों से संबोधित करने का हो या फिर कथित तौर पर वरुण गाँधी का अल्पसंख्यकों को.....शब्दों से संबोधित करने का हो, ये सारे मामले दुनियाँ के सबसे बड़े लोक तंत्र के नाम पर धब्बा हैं। अब वक़्त आगया है की हमारे नेताओं को इस तरह के शब्दों का चयन करने से पहले एक बार ज़रूर सोच लेना चाहिए की क्या ऐसे भद्दे शब्दों का इस्तेमाल एक नेता को दुसरे नेता के लिए या फिर हमारे नेताओं द्वारा ऐसे भद्दे शब्दों का प्रयोग क्या उस जनता जनार्धन के लिए शोभा देता है जो इन्हें खुद चुन कर संसद तक भेजती है। अगर इनका जवाब फिर भी हाँ होता है तो भैय्या ऐसी स्तिथि में तो हम सिर्फ इतना ही कह सकते हैं की इस देश का तो भगवन ही मालिक होगा, "ऑल इज़ वेल भैय्या ऑल इज़ वेल नथिंग इज़ रांग"।

Thursday, March 10, 2011

महिला दिवस

लोग कहते महिलाओं के सम्मान और गौरव को समर्पित यह दिवस जब भी आता है मुझे लगता है हम एक कदम आगे बढ़कर दो कदम पीछे चल रहे हैं। दिन की महत्ता से इंकार नहीं मगर उलझन तब होती है जब उपलब्धियों की रोशन चकाचौंध में कहीं कोई स्याह सच कराहता नजर आता है और एक कड़वाहट गले तक आ जाती है। फिर अचानक घनघोर अंधेरे के बीच भी दूर कहीं आशा की टिमटिमाती रोशनी दिखाई पड़ जाती है और मन फिर उजले कल के अच्छे सपने देखने लगता है।लेकिन क्या होगा इस दुनिया जहा महिला आज भी सुरछित नहीं है ? क्यों एक ओरत ७० और ८० के बीच आयु लुटेरो ने हत्या कर दी यह दिल्ली  की रहने वाली थी  लेकिन उस पर  दिल्ली की मुखमत्री शीला दीक्षित  कहती है दिल्ली मै महिलाये खुद को सुरछित  महसूस नहीं करती है . लेकिन यह सोचना ठीक नहीं है .की पुलिस आईगी  और सुरक्षा देगी किसी महिला की सुरक्षा परिवार और समाज से शुरू होती है ?