Monday, April 25, 2011

सत्य साईं बाबा ने ली दुनिया से विदाई

1 . सत्य साईं बाबा ने ली दुनिया से विदाई 


  आध्यात्मिक  गुरु सत्य साईं बाबा दुनिया मे नहीं रहे  .सत्य साईं बाबा ने रविवार सुबह 7:40 बजे उन्होंने नेअंतिम सासे ली                                                                                                     
 दिल का दौरा पड़ने से हुआ  देहांत |  पुरे देश मैं शोक की लहर दोड़ गई है | पुत्तापर्थी मार्केट शहर पूरा बंद हो चूका है  हर तरफ शोक की लहर है |
सत्य साई बाबा की हालत अत्यंत गंभीर पहले से २८ मार्च २०११ को  अस्पताल में भर्ती कराया गया था. और उनके सभी अंगों पर इलाज का बेहद मामूली असर हो रहा है.




2 .सत्य साईं बाबा का जिगर काम नहीं कर रहा है और रक्तचाप लगातार निम्न बना हुआ है जिसकी वजह से डॉक्टर बेहद चिंतित हैं.’

उन्होंने कहा कि सत्य साई बाबा कृत्रिम श्वांस यंत्र की मदद से सांस ले रहे हैं और उनके गुर्दों के लिए आज सुबह हीमोडायलिसिस की धीमी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.




3 .सत्य साईं बाबा के बारे मे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,


  • सत्‍य साईं का जन्‍म 23 नवंबर, 1926 को
  • आंध्र प्रदेश के पुट्टापर्थी में हुआ था. जिस
  • घर में सत्य साईं का जन्म हुआ, वो घर
  • अब एक मंदिर बन गया है.
  • सत्यनारायण राजू ने 14 साल की उम्र में
  • ही अपने माता-पिता और घर को छोड़कर
  • धार्मिक जीवन की राह पकड़ ली थी. चार
  • साल भ्रमण के बाद जब वो लौटे, तो उन्होंने
  • छह साल तक घर में रह कर साधना की, पर
  • जैसे-जैसे उनका यश फैलता गया, ये जगह 
  • छोटी पड़ती गयी.
  • बाद में यहां से कुछ किलोमीटर की दूरी 
  • पर साईं बाबा का मौजूदा आश्रम प्रसांथी
  • निलयम बनाया गया. जब सत्य साईं की 
  • तबीयत बिगड़ी, तबसे यहां पर दिन-रात 
  • देसी-विदेशी भक्तों की मौजूदगी में लगातार
  • भजन और कीर्तन जारी है.
  • 4. सत्य साईं के अंतिम दर्शन
सत्य साईं बाबा के अंतिम दर्शन के लिए भक्तजनों का तांता लगना शुरू हो गया है।  तेंदुलकर ने आज बाबा के नम आखों से श्रद्वासुमन अर्पित किए। सचिन के साथ उनकी पत्नी अंजली भी साथ थी।  सत्य साईं बाबा के अवसान से दुखी  सचिन तेंदुलकर ने रविवार को अपना 38वां जन्मदिन नहीं मनाया था। बाबा के अनन्य भक्त सचिन ने यह शोक समाचार सुनते ही खुद को होटल के कमरे में बंद कर लिया था। उनके साथ उनकी पत्नी और दोनों बच्चे भी मौजूद थे। सचिन के कमरे के बाहर डू नॉट डिस्टर्ब का बोर्ड लगा दिया गया। होटल सूत्रों ने बताया कि सचिन ने नाश्ता भी नहीं लिया। इसके अलावा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी  सत्य साईं बाबा के दर्शन करेंगे। 

5 . सत्य  साईं बाबा के भक्त ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,


  1 . 


                   सत्य साईं का आशीवार्द लेते कलाम


2 .


                           सत्य साईं का आशीवार्द  हुए  सचिन 


सत्य साईं  बाबा 23 -11 -1926  से 24 -04 -2011    
                        

Saturday, April 23, 2011

परीक्षा

उठकर छात्रों  मेहनत  कर लो ,और परीक्षा पास करो !!

थोडा घूमना कम करो ,थोड़ा खाना  कम करो 
मेहनत करना सीखो प्यारे ,बात बनाना बन्द करो !!

नकल और बेईमानी पर ,कभी नहीं तुम आस करो 
अपनी उन्नति चाहो तो तुम ,मेहनत पर विश्वास करो !!

खेलो  हसो  उठो और बेठो ,एक साथ इस उपवन  मे
छोटा बड़ा नहीं है कोई भेद न जानो अपने मन मे !!

उन्नति पथ पर बढने वाले ,कभी नहीं रुक सकते 
जो दिल मिल रहे है आपस मे वे दूर नहीं हो सकते है !!

इस बगिया के नहे फूलो ,इस बगिया को महकाना है 
स्कूल और अपने गुरुजन का ,तुम सबको  मान बढना है 

Tuesday, April 19, 2011

आतंकवाद का धर्म


आतंकवाद  का धर्म जति से कोई वास्ता नहीं होता है ,कोई सरोकार नहीं , दो बिल्कुल अलग चीजे है !एक धामिक इन्सान कभी दरिंदा नहीं बन सकता . मगर  आज जब की इंसानियत तबाह हो चुकी है या फिर हो रही है या फिर इतिहास अपने को दुहरा रहा है वषों साल पहले इन्सान जानवरों जेसी जिन्दगी गुजारता था !उसकी आदते भी लगभग  वैसी ही थी फिर देवी देवता अवतार व् पैगम्बर आते रहे और इन्सान की जिन्दगी संवरती रही !यह सिलसिला जारी रहा और इन्सान सही मायनो मे इन्सान बन गया !लेकिन इस संघर्ष जीवन मे धीरे -धीरे उसकी दिमागी उलझने बढती गई और उसकी आध्यात्मिक  ताकते कमजोर होती गई और वह अपनी मंजिल से बेखबर होता गया !इसमे कमज़ोरिया बढती गयी ! शेतानी ताकते जो दिल व् दिमाग के किसी कोने मे सिसक रही थी ,कराह रही थी और ताकत बनकर इन्सान पर छा गयी और आज के दौर मे इन्सान एक बेरहम दरिन्दे की शक्ल मे आ गया !कितनी अफ़सोस की बात है !हमारी जिन्दगी जीने का स्तर इस हद तक गिर चूका है , हम इस कदर जलील हो गये है की मन्दिर , मस्जिद गुरुदारा का सम्मान भी भूल गये है ! मदों ,औरतो बच्चो  मासूम  को निशना बनते है मंदिर मे जहा ईश्वर की पूजा होती है वही देवी -देवता पर फूल चढाये जाते है लोग अपनी आत्माओ की शांति के लिए जाते है वहा हम बम विस्फोट करके इन धर्मिक लोगो की जिन्दगिया छीन लेते है इनकी  ऐसी हरकतों से इस्लाम बदनाम हो रहा है ! एक सच्चा मुसलमान सही मायनो मे खुदा का फरमाबरदार है और गुलाम है !हर जगह पर कुदरत ने इसके लिये हुक्म दिये है खाने मे .पीने मे उठने मे बेठने मे मोहल्ले / पड़ोसियों के हक यानि की लड़ाई  झगड़े मे एहतियात पर जोर दिया गया है इस्लाम नाम है गरीबो और बेसहारा लोगो पर हाथ रखना लेकिन अफ़सोस है की यह सारी खुबिया हमने खो दी !अभी तक वारदात होई है उस इस्लाम का हाथ होता  है !इसमे हमारे हिन्दू भाइयो  ने जिस कदर समझबूझ और सब्र से कम लिया इसकी जितनी भी तारीफ की जाये कम है यह इनकी कमजोरी नहीं बड़ाई है ! लेकिन जिन्दगी और मौत का सवाल यह तो भगवान के हाथ मे है! मौत  किसे और किस समय आयगी किसी की नहीं मालूम ! हमारा मजहब अपनी खूबिया की वजह से सम्मान की द्रष्टि दे देखा जाता था !आज मुसलमान आतकियो के नाम से मशहूर है ! क्यों लोग नफरत की नजर से देखते है क्यों मारो भगाओ के नारे बुलंद होते है ! इसका सबब है मजहब से दूरी और गुमराही हमारा  जमीर हमे गलत रह दिखाता है हमारे  दिमाग की सोच कही गहराई मे गम हो गई लेकिन इसका मतलब यह नहीं की हम हमेशा इस जहरआलूद जिन्दगी मे जुल्म व् बेरहमी का शिकार होते रहेगे अपने देशो की हिफाजत हमारा फर्ज है हमारा ईमान है , मजहब से हमे हुक्म मिला है !हम आपस मे लड़ते झगड़ते है फिर मिलते है क्या भाई भाई नहीं लड़ते लेकिन कोई बाहरी  हम से लड़ने आता तो एक हो जाता हूँ  हम सब हिम्मत व् हौसले से काम लेगे !हम आपस मे भाईचारा भरोसा और विश्वास को बनाए रखेगे !जब हम सब एक रहेगे दहशतगदी खुद अपनी मौत मर जायेगी फिर  बेगुनाहों का खून नहीं बहाया जा सकेगा फिर कभी भी मन्न्दिरो मस्जिद और गुरुदारो मे विस्फोट नहीं होगा !हम सब मिलकर अपने-अपने धर्म की  अच्छाइयो  अ प्रचार करे सभी धर्म मिलकर कोशिश और मेहनत करे  मेहनत कभी भी बेकार नहीं जाती अगर लग्न से जाये !हम सब की राहे अलग -अलग है लेकिन मंजिल सबकी एक है 


                                               (आतंकवाद का धर्म )

नेता जी कहते है



श्री मान आप लोगो का वोट यदि पायेगे
केहू जोवन  किया अहि क्र के दिखायेगे  !
                                       
                                           बक -बक करो मत विचार सुओ मोरा ,
                                            हर हार मे करवा दुगा रोजगार थोडा !
                                            कोने -कोने बिजली का तार दौरायेगे ,
                                            केहू जोवन  किया नहीं कर के दिखायेगे !!
फ्री मे पढ़ाई होगी ,फ्री मे दवाई ,
गाव गाव रोड चक रोड बन जाई !

                                              वृद्धा पेशन बुड्ढा और बुड्ढी को दिलायेगे ,
                                              केहू जोवन  किया नहीं कर के दिखायेगे !
                                              फिर नहीं होगी जोवन भाई हमसे गलती ,
                                              का करे सरकारे जब मार दिया पल्टी !!
गाव की बात जाकर दिल्ली मे उठायेगे  ,
केहू जोवन किया नहीं कर के दिखायेगे !!
    


                           (यह वोट के पहले  नेताओं  की बाते है )

Thursday, April 7, 2011

अन्ना हजारे के बारे मे

अन्ना  हजारे  का  जन्म  १५  जून  १९३८  को  महाराष्ट्र  के       

अहमदनगर  के  भिगर  कस्बे  मे  हुआ  अन्ना  हजारे  का  असली
  
नाम   डॉ  किसन  बाबूराव  हजारे  है  अन्ना  का  बचपन  बहुत  ही 

गरीबी  हुआ  अन्ना  हजारे  के  पिता   मजदूरी  करते  थे  और 

 अन्ना  हजारे  के  बाबा  फौजी  थे  अन्ना  ६  भाई  थे  अन्ना  का 

परिवार  बहुत  गरीब  था  अन्ना  हजारे  परिवार  मे  गरीबी  और

 खाने  पीने  तगी  देख  कर  अन्ना  की  बुआ अन्ना  को  मुंबई  ले

 गई  और  वह  अन्ना  ने  सातवी  तक  पढ़ाई  की  और  अन्ना  

हजारे  अपनी  बुआ  के  परिवार  मे  बोझ  देखकर  वह  फूल  की  

 दुकान  पर  काम  करने  लगे  जहा  उन्हें  ४०  रुपया  मजदूरी  

मिलती  थी  और  उस  के  बाद  अन्ना  हजारे  ने  फूल  की  दुकान 

खोल  ली  और  अपने  पास  दो भाई  को  बुला  लिया  अन्ना  हजारे 

इसाफ़  की  लड़ाई  लड़ने  से  पहले  सीमा  पर  देश  के दुश्मनों  से 

मुकवला  कर  चुक  है  सन १९६२  मे  चीन  लड़ाई  के  बाद  भारत     

 की  युवाओं  की  सेना  मे  भाति  हुए  लोग  अन्ना  हजारे  को   

गांधी  भी  कहते  है  और  अन्ना  हजारे  ने  १९७०  मे  उन्होंने 

आजीवन  अविवाहित  रहने  का  सकल्प  किया  अन्ना  हजारे  की 

जन्मू  पोस्टिंग   के  दौरान  १५  साल  मे  पूरे  होने  पर  १९७५  मे 

उन्होंने  वी  आर  एस  ले  लिया  और  अन्ना  हजारे  अपने  गाव  मे 

आकर  डट  गये  और  अन्ना  हजारे  ने  अपने  गाव  की  तस्वीर

 बदल  दी  और  हजारे  ने  अपनी  जमीन  बच्चो  के  हास्टल के  

लिए  दान  मे  दे  दी . अन्ना  हजारे  का  आज  भी  पेशन  का  पैसा 

उनके  गाव  के  विकास  के  लिए  खर्च  होता  है  वह अपने देश  के 

लिए  राम  है  और वह  अपनी सेना  के  साथ  मुहीम  पर  निकल 

चुके  है . अन्ना  हजारे  भ्रष्टाचार  के खिलाफ मुहिम चला  रहे है 

अन्ना हजारे भ्रष्टाचार के विरोध और जन लोकपाल बिल के लिए 

अपने हजारो सहयोगियों के दिल्ली के जन्तर मंतरपर अन्य त्याग 

मुहिम पर बेठ गये है अन्ना हजारे चाहते है  की देश मे जो भ्रष्टाचार 

हो रहा है 

उस सरकार जन  लोकपाल बिल तुरत लाये और लोकपाल की 

सिफरिशे आनिवार्य  तोर पर लागू हो और लोकपाल को जजों सासदो 

.विधायक आदि  पर भी मुकदमा चलाने का आधिकार हो अन्ना  

हजारे अपनी  मुहिम पर दते हुए है //////////////////////////////////


अन्ना हजारे सघर्ष करो : देश तुम्हारे साथ  है 

                                                 भारत  मे भ्रष्टाचार का अन्त करो  

Monday, April 4, 2011

जय माता दी

                                                         जय माता दी 
नवरात्रि का त्योहार नौ दिनों तक चलता है। इन नौ दिनों में तीन देवियों पार्वती, लक्ष्मी और सरस्वती के नौ स्वरुपों की पूजा की जाती है। पहले तीन दिन पार्वती के तीन स्वरुपों (कुमार, पार्वती और काली), अगले तीन दिन लक्ष्मी माता के स्वरुपों और आखिरी के तीन दिन सरस्वती माता के स्वरुपों की पूजा करते है
नौ  रूप 
  1. प्रथम दुर्गा : श्री शैलपुत्री
  2. द्वितीय दुर्गा : श्री ब्रह्मचारिणी
  3. तृतीय दुर्गा : श्री चंद्रघंटा
  4. चतुर्थ दुर्गा : श्री कूष्मांडा
  5. पंचम दुर्गा : श्री स्कंदमाता
  6. षष्ठम दुर्गा : श्री कात्यायनी
  7. सप्तम दुर्गा : श्री कालरात्रि
  8. अष्टम दुर्गा : श्री महागौरी
  9. नवम् दुर्गा : श्री सिद्धिदात्री       
 नवरात्रि का  नौ दिनों व्रत  रखने से सुख की प्रत्ति होती है माँ दुर्गाका शब्द माँ से ही जीवन का आरंभ होता है,मां कर्म, विचार और ऊर्जा को नियंत्रित करने वाली होती है। यही कारण है कि हिन्दू धर्म में शक्ति उपासना का महत्व बताया गया है। हिन्दू नववर्ष की शुरूआत भी नवदुर्गा की उपासना से होती है। चैत्र माह के पहले नौ दिनों में मातृशक्ति के नौ अलग-अलग रूपों का स्मरण किया जाता है। 
१.  प्रथम दुर्गा : श्री शैलपुत्री
                                         आदिशक्ति श्री दुर्गा का प्रथम रूप श्री शैलपुत्री हैं। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण ये शैलपुत्री कहलाती हैं। नवरात्र के प्रथम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इनके पूजन से मूलाधर चक्र जाग्रत होता है, जिससे साधक को मूलाधार चक्र जाग्रत होने से प्राप्त होने वाली सिद्धियां प्राप्त होती हैं।
२. द्वितीय दुर्गा : श्री ब्रह्मचारिणी -
                                               श्री दुर्गा का द्वितीय रूप श्री ब्रह्मचारिणी हैं। यहां ब्रह्मचारिणी का तात्पर्य तपश्चारिणी है। इन्होंने भगवान शंकर को पति रूप से प्राप्त करने के लिए घोप तपस्या की थी। अतः ये तपश्चारिणी और ब्रह्मचारिणी के नाम से विख्यात हैं। नवरात्रि के द्वितीय दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इनकी उपासना से मनुष्य के तप, त्याग, वैराग्य सदाचार, संयम की वृद्धि होती है तथा मन कर्तव्य पथ से विचलित नहीं होता।
३.तृतीय दुर्गा : श्री चंद्रघंटा-
                                          इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। नवरात्रि के तृतीय दिन इनका पूजन और अर्चना किया जाता है। इनके पूजन से साधक को मणिपुर चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं तथा सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिलती है।
  ४ .चतुर्थ दुर्गा : श्री कूष्मांडा- 
                                         नवरात्रि के चतुर्थ दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। श्री कूष्मांडा के पूजन से अनाहत चक्र जाग्रति की सिद्धियां प्राप्त होती हैं। श्री कूष्मांडा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक नष्ट हो जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है।
५. पंचम दुर्गा : श्री स्कंदमाता-                                                                                                           नवरात्रि के पंचम दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इनकी आराधना से विशुद्ध चक्र के जाग्रत होने वाली सिद्धियां स्वतः प्राप्त हो जाती हैं तथा मृत्युलोक में ही साधक को परम शांति और सुख का अनुभव होने लगता है। उसके लिए मोक्ष का द्वार स्वंयमेव सुलभ हो जाता है।
६. षष्ठम दुर्गा : श्री कात्यायनी
                                              श्री दुर्गा का षष्ठम् रूप श्री कात्यायनी। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वे कात्यायनी कहलाती हैं। नवरात्रि के षष्ठम दिन इनकी पूजा और आराधना होती है। श्री कात्यायनी की उपासना से आज्ञा चक्र जाग्रति की सिद्धियां साधक को स्वयंमेव प्राप्त हो जाती है। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौलिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है तथा उसके रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वथा विनष्ट हो जाते हैं।
 ७. सप्तम दुर्गा : श्री कालरात्रि- 
                                              मा कालरात्री  इनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह काला है। सिर के बाल बिखरे है। गले मे विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। तीन नेत्र है। इनके वाहन गर्दभ है। इनका स्वरूप देखने मे अत्यंत भयंकर है।
८ .अष्टम दुर्गा : श्री महागौरी- 
                                        मा महागौरी  मा की आठवी शक्ती का नाम महागौरी है। यह गौर वर्ण की है। अपने पार्वती रूप मे इन्होने भगवान शिव को पती रूप मे प्राप्त करने का कठोर तपस्या की थी
९.नवम् दुर्गा : श्री सिद्धिदात्री- 
                                          नवरात्रि के नवम् दिन इनकी पूजा और आराधना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त निर्वाण चक्र (मध्य कपाल) में स्थिर कर अपनी साधना करनी चाहिए। श्री सिद्धिदात्री की साधना करने वाले साधक को सभी  देवी कुराण के अनुसार भगवान शिव ने इनकी कृपा से सिद्धियो को प्राप्त किया था। इन्ही की अनुकंपा से भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ था। इनका वाहन सिंह है। यह कमल पुष्प पर आसीन होती है।



Sunday, April 3, 2011

28 साल के बाद फिर रचा इतिहास

भारत  ने 28 साल बाद फिर  विश्व  कप  हासिल किया  इस से  पहले  कपिल देव की कप्तानी  मे  सन 1983 मे  विश्व कप पर हासिल किया  था  ? ये विश्व कप  के कप्तान महेद्र सिंह  धोनी ने  28 साल बाद कप हासिल किया है 
मुबई  के वानखेड़े  और पूरे देश मे गुजती हुई  आवाजे  मानो यादगार रहे गई 
श्रीलका  ने पहले  बल्लेबाजी  करते हुये  274 रन  का विशाल  स्कोर दिया . भारत के बल्लेबाज  जब  बल्लेबाजी  करने  गये तो मानो  सासे  करोड़ो  लोगो की थम  गई  थी  क्यों क़ि सहवाग  मलिगा  क़ि २ गेद खेल कर  एल बी डब्लू होकर  ऐसे ही सचिन  14 गेदे  खेल कर 18 बनाकर आउट हो गये  मानो भारत के करोड़ो लोगो क़ि सासे थम  गई  थी . अब विश्व कप हासिल करना मोश्किल हो गया . लेकिन भारत के करोड़ो लोगो  दुआ  भारत  के खिलाडियो  पर क़ि जा रही थी . क़ि मानो गभीर और कोहली ने शानदार पारी  खेल कर भारत उम्मीदे  पर खड़ा कर दिया इस के बाद धोनी और युवराज  ने  शानदार 91 रन धोनी  और 21 रन युवराज ने बनाकर  भारत ने 28 का सपना जो था  उस पर भारत ने कव्जा कर लिया 
हाथों में तिरंगा, चेहरों पर खुशी, जुबां पर चक दे..चक दे इंडिया, भारत माता की जय.. जैसे नारे.. गाड़ी की छत हो या सड़क खुशी से झूमता तन-मन, आसमान में बिखरती पटाखों की रंग-बिरंगी रोशनी और कानों में गूंजता पटाखों का शोर.., मिठाइयों के साथ खुशियां बांटते लोग.. 28 साल बाद फिर क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतने पर शहर की प्रमुख सड़कों या बाजारों ही नहीं गलियों में भी यही नजारा था।
 
चाहे श्रीलंका की बैटिंग के दौरान आखिरी के 5 ओवर की धुआंधार बैटिंग हो या भारतीय पारी के दौरान सहवाग और सचिन के विकेट का गिरना। कुछ लोगों ने टीवी ही बंद कर दिए, तो कुछ लोग टीम को जिताने के लिए तमाम नुस्खे आजमाने लगे। इन नुस्खों के पीछे भले ही वहम हो, लेकिन दर्शकों का मानना था कि टीम ऐसे ही नहीं जीतती, जिताना पड़ता है।
कुछ लोगों ने न तो टीवी देखा, न ही अपनी कुर्सी छोड़ी। कई लोगों ने पानी पीने के लिए उठना भी मुनासिब नहीं समझा। कुछ लोग ऐसे भी रहे जो टीवी के सामने तो बैठे रहे लेकिन पूरे मैच के दौरान अपनी मुद्रा नहीं बदली, यानी जिस पोजिशन में थे उसी में पूरा मैच देखा .. और इंडिया ने वर्ल्ड कप जीत लिया।
विश्व कप में भारत की जीत का सस्पेंस जितना पीक पर पहुंचा, बाद में जश्न की खुमारी उतनी ही ज्यादा चढ़ी। विश्व विजेता बनने के बाद दो दिन पहले मनाए गए जश्न शहर में एक्शन रिप्ले हुआ। लोग मैच के साथ अपने कामकाज भी निपटा रहे थे, लेकिन जब मैच हाथ से निकलता दिखा तो लोग टीवी पर चिपक गए।अंत में भारत के मैच जीतने पर सभी क्रिकेट प्रेमियों ने एक दूसरे को बधाई दी |