Friday, March 11, 2011

सियासत इस वतन की इस कदर गंदी ना थी पहले



पिछले दिनों मैं एक लोक संगीत कार्यक्रम में गया और वहां पर एक भोजपुरी लोक गायक से मिला। पहले तो मैं रंगा रंग कार्यक्रम का लुत्फ़ उठाया और लौटते समय सोचा क्यूं ना इससे पूछूं भैय्या बीजेपी के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने लालू और मुलायम जी को कुछ ......शब्दों से संबोधित किया है। सो निकलते समय मैंने पूछ ही लिया। गायक का जवाब काफी दिलचस्प था, उसने जवाब कुछ यूं दिया बोला भैय्या मत पूछो ये सब सियासत का खेल है कोई पास तो कोई फेल है। ये सब आपस में एक दुसरे के भाई बंधू हैं, बात तो सिर्फ इतनी ही न थी भैय्या की लालू और मुलायाम जी ने महंगाई के मुद्दे पर सिर्फ दहाड़ लगाकर अपना कोरम पूरा किया और बाद में मामला ठंढा पड़ते ही यूपीए सरकार के साथ हो लिए। लेकिन बीजेपी के नए नवेले दुल्हे को यह नागवार गुज़रा और कह दिया "पहले तो शेर की तरह दहाड़ लगा रहे थे और अब.....की तरह तलवे चाटने लगे हैं" तो इस में गलत ही क्या कहा सही ही तो कहा है। पर भैय्या इसमें लालू और मुलायम जी का भी कहाँ दोष है, कहते हैं ना भैय्या "जिसकी लाठी उसकी भैंस" अब अगर लाठी कांग्रेस के हाथ में है तो कौन जानता है की सीबीआई का डंडा कब इनके सिर पड़ जाए तो ऐसे हालात में भैय्या कोंग्रेस की ही जय-जय कर करने में भलाई है। आगे लोक गायक कुछ रुंधे हुए स्वर में कहता है की भैय्या हम लोगन के ऐसे विवाद से का लेवे देवे का है। हम तो रोज कुंवां खोदते हैं और रोज़ अपनी प्यास बुझाते हैं। हम गरीबन का कौन सुनता है भैय्या, हम गरीब भूखे बिलखते रहते हैं और जब आपन बच्चन का हम लोगन से तड़प नाहीं देखी जाती तो हम आत्महत्त्या करने के लिए मज़बूर हो जाते हैं। आप ही देखो ना भैय्या यह कैसा अपवाद है कि इस देश में पहले तो चीनी १२.५० रूपया प्रति किलो से एक लाख टन निर्यात किया जाता है और फिर उसी चीनी को ४८ रुपया प्रति किलो के भाव से आयात किया जाता है और फिर हम लोगन को इतने महंगे दामों पर खरीदना पड़ता है। इस देश के कृषि मंत्री कहते हैं की हर साल ५८००० हजार करोड़ रुपए का अनाज सरकारी गोदामों में ही सड़ जाता है और हम गरीब एक-एक दाने के लिए मोहताज़ रहते हैं।
गायक की यह सारी बातें सुन कर मैं भी ग़मगीन हो गया सोचा क्यों ना माहौल को थोड़ा ठंढा करते हैं। मैंने गायक से कहा चलते-चलते भोजपुरी लोक संगीत की कुछ लाइनें सुना दो। गायन सुनाने से पहले बोला भैय्या तो इन नेता परेता लोगन के चक्कर में नहीं पड़ो तो अच्छा है। भैय्या जिस बीजेपी के अध्यक्ष को महंगाई के बढ़ने से आम जनता की इतनी चिंता हो रही है की संसद में वोटिंग भी कराने से पीछे नहीं हटे, उसी बीजेपी की सरकार में सन १९९८ में माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेई जी के कार्यकाल में प्याज और नमक के दाम आसमान छू रहे थे। गायक बोला उसी ज़माने में मैंने एक सुपर डुपर हिट धुन बनाई थी कहो तो सुनाऊँ, मैंने कहा ज़रूर, पहले तो उसने हारमोनियम से बहुत उम्दा धुन निकाल कर पुरे वातावरण में मीठास घोल दी और आगे की लाईने कुछ यूं सुनाई "बाहरे अटल चाचा निमक खातिन मार हो गइल-२ अउर पियजिया अनार हो गइल........पियजिया अनार हो गइल......" यह सच है कि इस लोक गायक ने हमारे नताओं का सत्ता की लोभ में किजानेवाली ओछी राजनीति का काला चिठ्ठा खोल कर रख दिया। किसी नें कहा है कि,
"सियासत इस वतन की इस कदर गंदी ना थी पहले, रिदाए मादरे हिंदुस्तान मैली ना थी पहले मगर पहले सियासत में लफंगे भी ना आये थे, गली के चोर उचक्के जेब कतरे भी ना आये थे।
शरीफ इंसान जो होता था पहनता था वही खद्दर, जो बा इज्ज़त हुवा करता था बनता था वही लीडर।
मगर अब तो शरीफ इंसान की गुंजाईश बहुत कम है, सियासत में वही आता है जिसके हाथ में बम है॥ "
आज हमारे देश में राजनीति का स्तर दिन प्रति दिन गिरता चला जा रहा है। मामला चाहे रीता बहुगुणा जोशी का मायावती जी को अपशब्दों से संबोधित करने का हो या फिर कथित तौर पर वरुण गाँधी का अल्पसंख्यकों को.....शब्दों से संबोधित करने का हो, ये सारे मामले दुनियाँ के सबसे बड़े लोक तंत्र के नाम पर धब्बा हैं। अब वक़्त आगया है की हमारे नेताओं को इस तरह के शब्दों का चयन करने से पहले एक बार ज़रूर सोच लेना चाहिए की क्या ऐसे भद्दे शब्दों का इस्तेमाल एक नेता को दुसरे नेता के लिए या फिर हमारे नेताओं द्वारा ऐसे भद्दे शब्दों का प्रयोग क्या उस जनता जनार्धन के लिए शोभा देता है जो इन्हें खुद चुन कर संसद तक भेजती है। अगर इनका जवाब फिर भी हाँ होता है तो भैय्या ऐसी स्तिथि में तो हम सिर्फ इतना ही कह सकते हैं की इस देश का तो भगवन ही मालिक होगा, "ऑल इज़ वेल भैय्या ऑल इज़ वेल नथिंग इज़ रांग"।

1 comment:

  1. desh deepak mishra
    बस कुछ सपने के पीछे भाग रहा हूँ, देखता हूँ कब पुरे होते हैं वो...होते भी हैं या नहीं!

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